कश्मीरी महिला का इलाज मना करने के मुद्दे से पीजीआई की साख पूरे देश में धूमिल हुई है। इस खबर से पीजीआई के डाक्टर मायूस हैं। उनका कहना है कि डाक्टर व मरीज के बीच संवाद में कोई कमी रही होगी। वरना पीजीआई का कोई भी डॉक्टर ऐसा कमेंट पास नहीं कर सकता। पीजीआई के डायरेक्टर प्रोफेसर जगत राम ने कहा कि कश्मीरी तो छोड़िए, पीजीआई पाकिस्तान के मरीजों को इलाज बिना किसी भेदभाव के करता है।
पाकिस्तान के एक बच्चे नोमान का इलाज साल 2012 से पीजीआई में चल रहा है। बच्चे का वीजा व उसके बनाने की प्रक्रिया में पीजीआई काफी सहयोग करता है। एडवांस आई सेंटर के एचओडी के पर्सनल असिस्टेंट दीपक जुगरान ने बताया कि पीजीआई की ओर से भेजे गए निमंत्रण पत्र के आधार पर ही बच्चे को वीजा मिलता है। इलाज में भी प्राथमिकता दी जाती है ताकि तय समय में वह अपना इलाज करा सकें। जब उनकों पीजीआई आना होता है तो वे दीपक को ही फोन करते हैं।
जम्मू-कश्मीर से 53 हजार मरीज आते हैं हर साल
पीजीआई की सांख्यिकी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015-16 में जम्मू-कश्मीर से कुल 53 मरीजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। ये सिर्फ ओपीडी का आंकड़ा है। इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर के मरीजों की गिनती शामिल नहीं की गई है। एडवांस आई सेंटर की प्रोफेसर उषा सिंह ने बताया कि आंखों में कैंसर के कई मरीज आई सेंटर में आते हैं। संस्थान की कोशिश रहती है कि कश्मीर व दूरदराज से आए लोगों को इलाज में प्राथमिकता दी जाए।
कश्मीरी बच्चे का कराया था इलाज
प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई
- फोटो : File Photo
कश्मीरी बच्चे का कराया था इलाज
प्रोफेसर जगतराम ने बताया कि कुछ साल पहले कश्मीर से एक बच्चा अपने पेरेंट्स के साथ आई सेंटर के बाहर खड़ा था। बच्चे की आंख में कैंसर था। बच्चे के पेरेंट्स ने बताया कि उनका नंबर नहीं आया। उन्हें बाद में आने को कहा गया है। प्रो. जगतराम ने उन्हें देखा और बच्चे का हाल चाल पूछा। जगतराम ने देखा कि बच्चा काफी गंभीर है। उसे इलाज की सख्त जरूरत है। तत्काल उन्होंने डा. उषा को फोन कर बच्चे को जल्द से जल्द इलाज उपलब्ध कराने कहा था। बच्चे का इलाज अगले दिन से शुरू हो गया था।
पीजीआई कभी भी मरीजों के साथ भेदभाव नहीं करता है। मेरे विभाग में कई सारे पेशेंट जम्मू व कश्मीर से आते हैं। सभी मेरे संपर्क में हैं। कभी भी उन्हें इलाज में कोई दिक्कत नहीं आई, जबकि हमारी कोशिश रहती है कि दूरदराज से आए मरीजों को जल्दी इलाज दिया जाए। मुझे नहीं लगता है कि किसी डाक्टर ने इसलिए इलाज करने से मना दिया कि वे कश्मीर से आए हैं।
डा. सोमबीर सिंह, प्रेसिडेंट, एआरडी पीजीआई
कश्मीर की छोड़िए, पीजीआई तो पाकिस्तान के मरीजों का इलाज करता आया है। हो सकता है कि डाक्टर व मरीज के बीच संवाद में कोई कमी रही हो। मुझे संस्थान के सभी डाक्टरों पर विश्वास है कि वे कभी इस तरह की हरकत नहीं करेंगे।
प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई