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कोरोना वॉरियर ने बताया- हॉस्पिटल में ड्यूटी का मतलब, न पानी पी सकते और न ही टॉयलेट जा सकते हैं

Sun, 19 Apr 2020 04:40 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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PGI Chandigarh
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कोरोना की जंग में फ्रंट फुट पर डॉक्टर और नर्सेज हैं। वे अपनी जान की बाजी लगाकर मरीजों के इलाज में जुटे हैं। ऐसे ही एक योद्धा पीजीआई के नर्सिंग ऑफिसर राजेंद्र कुमार मीना हैं, जो पीजीआई के कोविड हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में तैनात थे। उन्होंने बताया कि जब कोविड- 19 आया तो उनके मन में थोड़ा डर था लेकिन जब कोविड में ड्यूटी लगी तो डर नाम की कोई चीज नहीं रही। 

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राजेंद्र अब इस बात से बहुत खुश है कि वे भी कोविड की लड़ाई का अहम हिस्सा हैं। राजेंद्र के मुताबिक कोविड वार्ड में ड्यूटी देना आसान नहीं होता। हर वक्त खतरे से जूझना पड़ता है। ड्यूटी तो छह घंटे की होती है लेकिन सात घंटे लग ही जाते थे। इस दौरान न तो पानी पीते हैं और न ही टायलेट जाते हैं। घर से ही पानी पीकर आना पड़ता था। जब कोई पीपीई किट पहन लेता है तो उसे ड्यूटी खत्म होने के बाद उतारना पड़ता है। 

बार-बार बदलने से संक्रमित होने का खतरा रहता है। ड्यूटी के वक्त मन में इस बात को बार-बार दोहराना पड़ता था कि हाथ को चेहरे तक नहीं ले जाना है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही खतरे में डाल सकती थी। 

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मां को नहीं बताया कि ड्यूटी कोविड वार्ड में लगी है

मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले राजेंद्र ने बताया कि जब वे कोविड हॉस्पिटल में ड्यूटी कर रहे थे, तब उनकी मां का फोन आया था और पूछा था कि क्या तुम्हारी ड्यूटी भी कोरोना वार्ड में लगी है तो राजेंद्र ने मना कर दिया। उनकी मां हाइपरटेंशन व बीपी की मरीज हैं।

राजेंद्र को इस बात का अहसास था कि यदि वे अपनी मां को सच्चाई बता देते तो उनकी तबीयत बिगड़ सकती थी। हालांकि, उन्होंने अपनी पत्नी को जरूर बता दिया था कि उनकी ड्यूटी कोरोना हॉस्पिटल में लगी है। राजेंद्र ने बताया कि उन्होंने अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी और जज्बे के साथ निभाई है। 

ड्यूटी देने के बाद होम क्वारंटीन में हैं
पीजीआई प्रशासन ने एहतियात के तौर पर राजेंद्र को इस वक्त होम क्वांरटीन में भेज दिया है। वे अपने घर पर ही हैं। उनके मुताबिक उन्हें कभी पीपीई किट या अन्य उपकरण की कोई कमी महसूस नहीं हुई। पीजीआई प्रशासन व पीजीआई नर्सिंग एसोसिएशन की ओर से इस दिशा में अच्छा काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यदि कोरोना वायरस लंबा चलता है तो उनकी ड्यूटी दोबारा से वार्ड में लगती है। अपनी इस ड्यूटी को वे दोबारा से पूरे जज्बे और ईमानदारी से निभाएंगे।
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