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दुनिया में छाया PGI चंडीगढ़: दिल की दवा से बनाया खास मलहम, मधुमेह रोगियों के जख्मों को जल्द भरेगा

Fri, 30 Sep 2022 08:20 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

डायबिटिक फुट अल्सर के मरीजों पर एस्मोलोल से बने मलहम का चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। ग्रुप बी की तुलना में ग्रुप ए के मरीजों का घाव 70 प्रतिशत तेजी से भरा। ग्रुप ए के मरीज अधिक लाभान्वित हुए जबकि ग्रुप बी के 30 प्रतिशत मरीज ही लाभान्वित हो सके।
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पीजीआई चंडीगढ़
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विस्तार
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हृदय रोगियों को लगाया जाना वाला एस्मोलोल इंजेक्शन अब डायबिटिक फुट अल्सर के मरीजों का घाव भरेगा। पीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग ने इस इंजेक्शन की मदद से एक मलहम तैयार किया है जो सामान्य इलाज से 70 प्रतिशत अधिक कारगर है। 19 से 23 सितंबर तक स्वीडन में आयोजित यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज के 48वें सम्मेलन में पीजीआई के इस शोध की सराहना की गई और सभी लोगों ने सम्मान में खड़े होकर विभाग के प्रोफेसर आशु रस्तोगी की सराहना की।

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प्रो. आशु ने बताया कि हृदय रोग में प्रयोग किए जाने वाले एस्मोलोल इंजेक्शन को इससे पहले किसी भी दूसरे मर्ज में इस्तेमाल नहीं किया गया था। स्वीडन में आयोजित सम्मेलन में विश्व भर के 2000 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए। इसमें उनके पेपर को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया।

उन्होंने बताया कि मलहम को बनाने के बाद देशभर के 27 चिकित्सा संस्थानों से 256 मधुमेह रोगियों का चयन किया गया। सबकी उम्र 56 वर्ष थी और उन्हें 10 वर्ष से मधुमेह की बीमारी थी। इनमें महिलाओं की संख्या 35 प्रतिशत व पुरुषों की संख्या 65 प्रतिशत रखी गई।

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शोध में इन मरीजों को दो भागों में बांटा गया। ग्रुप ए के मरीजों के घाव पर एस्मोलोल वाला मलहम जबकि जबकि ग्रुप बी के मरीजों के लिए सामान्य इलाज प्रक्रिया अपनाई गई। डायबिटिक फुट अल्सर के मरीजों पर एस्मोलोल से बने मलहम का चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। ग्रुप बी की तुलना में ग्रुप ए के मरीजों का घाव 70 प्रतिशत तेजी से भरा। ग्रुप ए के मरीज अधिक लाभान्वित हुए जबकि ग्रुप बी के 30 प्रतिशत मरीज ही लाभान्वित हो सके।

एस्मोलोल हृदय रोग में कारगर
एस्मोलोल इंजेक्शन का उपयोग दिल की धड़कन तेज होने या असामान्य हृदय ताल को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इस इंजेक्शन का उपयोग सर्जरी के दौरान, सर्जरी के बाद या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान दिल की तेज धड़कन और उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए भी किया जाता है।

ऐसे होता है डायबिटिक फुट अल्सर
मधुमेह की अधिकता के चलते मरीजों में अक्सर पैर का अल्सर हो जाता है। इसमें त्वचा के टिश्यू टूट जाते हैं और और नीचे की परतें दिखने लगती हैं। पैर में अल्सर ज्यादातर अंगूठे और पंजों के नीचे होता है और हड्डियों को भी प्रभावित करता है।
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कभी-कभी ऐसा होता है कि पैर में अल्सर हो जाने तक इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। डायबिटीज की बड़ी वजहों में विटामिन डी की कमी भी होती है। अगर किसी को मोटापे के साथ विटामिन डी की कमी हो जाए तो डायबिटिक फुट अल्सर का खतरा और भी बढ़ जाता है।

ये लापरवाही बन सकती है कारण
  • समय पर पैर के नाखून नहीं काटना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • जूतों का पैर में अच्छे से फिट न होना, जूतों की खराब क्वालिटी
  • पैर के खराब रख-रखाव, पैर को नियमित तौर पर नहीं धोना
  • मोटापा, हार्ट और किडनी रोग के कारण
  • तंबाकू का सेवन, खराब ब्लड सर्कुलेशन
 

प्रो. आशु रस्तोगी के शोध ने पीजीआई के साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया है। इस उपलब्धि से डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में एक महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ी है। - प्रो. विवेकलाल, निदेशक, पीजीआई

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