शोध में इन मरीजों को दो भागों में बांटा गया। ग्रुप ए के मरीजों के घाव पर एस्मोलोल वाला मलहम जबकि जबकि ग्रुप बी के मरीजों के लिए सामान्य इलाज प्रक्रिया अपनाई गई। डायबिटिक फुट अल्सर के मरीजों पर एस्मोलोल से बने मलहम का चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। ग्रुप बी की तुलना में ग्रुप ए के मरीजों का घाव 70 प्रतिशत तेजी से भरा। ग्रुप ए के मरीज अधिक लाभान्वित हुए जबकि ग्रुप बी के 30 प्रतिशत मरीज ही लाभान्वित हो सके।
एस्मोलोल हृदय रोग में कारगर
एस्मोलोल इंजेक्शन का उपयोग दिल की धड़कन तेज होने या असामान्य हृदय ताल को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इस इंजेक्शन का उपयोग सर्जरी के दौरान, सर्जरी के बाद या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान दिल की तेज धड़कन और उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए भी किया जाता है।
ऐसे होता है डायबिटिक फुट अल्सर
मधुमेह की अधिकता के चलते मरीजों में अक्सर पैर का अल्सर हो जाता है। इसमें त्वचा के टिश्यू टूट जाते हैं और और नीचे की परतें दिखने लगती हैं। पैर में अल्सर ज्यादातर अंगूठे और पंजों के नीचे होता है और हड्डियों को भी प्रभावित करता है।
कभी-कभी ऐसा होता है कि पैर में अल्सर हो जाने तक इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। डायबिटीज की बड़ी वजहों में विटामिन डी की कमी भी होती है। अगर किसी को मोटापे के साथ विटामिन डी की कमी हो जाए तो डायबिटिक फुट अल्सर का खतरा और भी बढ़ जाता है।
ये लापरवाही बन सकती है कारण
- समय पर पैर के नाखून नहीं काटना
- अत्यधिक शराब का सेवन
- जूतों का पैर में अच्छे से फिट न होना, जूतों की खराब क्वालिटी
- पैर के खराब रख-रखाव, पैर को नियमित तौर पर नहीं धोना
- मोटापा, हार्ट और किडनी रोग के कारण
- तंबाकू का सेवन, खराब ब्लड सर्कुलेशन
प्रो. आशु रस्तोगी के शोध ने पीजीआई के साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया है। इस उपलब्धि से डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में एक महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ी है। - प्रो. विवेकलाल, निदेशक, पीजीआई