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Chandigarh News: पीजीआई ने बनाया विशेष कार्ड, आईबीडी के मरीजों की कहीं भी इलाज कराने की राह हुई आसान

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वीणा तिवारी चंडीगढ़। पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) के मरीजों की मुश्किल आसान करने के लिए विशेष पहल शुरू की है। विभाग की ओर से पीजीआई में इस मर्ज से ग्रस्त पंजीकृत मरीजों का विशेष आईडीबी कार्ड तैयार किया जा रहा है। उस कार्ड में मरीज के मर्ज से संबंधित एक-एक ब्यौरा दर्ज किया जा रहा है ताकि पीजीआई के अलावा किसी भी अन्य अस्पताल में इलाज के लिए जाने पर उनके डॉक्टर को किसी तरह की दुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही इस विशेष कार्य की मदद से डॉक्टर चंद मिनटों में उस मरीज को देने वाले इलाज का निर्णय ले सके।
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गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि इस बीमारी में प्रत्येक मरीज की स्थिति एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती है। उस स्थिति का बारीकी से आकलन करने के बाद ही इलाज की रणनीति तैयार की जाती है। ऐसे में मरीज के एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो जाने या भविष्य में मर्ज के गंभीर हो जाने पर उसे इलाज के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ती है क्योंकि जरूरी नहीं कि वो मरीज इलाज के लिए फिर से पीजीआई ही आएं। ऐसे में अन्य अस्पताल में जाने पर डाॅक्टर उसके मर्ज का आकलन करने और उसकी हिस्ट्री जानने, टेस्ट रिपोर्ट आने का इंतजार करता है। ऐसा किए बिना वो दवाओं संबंधित निर्णय नहीं ले सकता। इसलिए इस स्थिति से बचाव के लिए विशेष कार्ड तैयार किया गया है, जिसमें कुछ पन्नों में मरीज से जुड़ी हर तरह की जानकारी शामिल की गई है। इस कार्ड के आधार पर संबंधित डॉक्टर बिना देरी किए इलाज शुरू कर सकता है।

बॉक्स
इन सूचनाओं को किया शामिल
मरीज की बीमारी का विस्तार से ब्यौरा, आंत के किस हिस्से में है मर्ज, उसकी तीव्रता कितनी है, उसे कौन सी दवाएं दी जा रही है और पूर्व में कौन सी दी गई थी, उन दवाओं का प्रभाव लाभ और हानि दोनों परिपेक्ष्य में, आंत के बाहर की दिक्कतों के बारे में, मरीज की हिस्ट्री, आंत की जटिलता, सभी टेस्ट रिपोर्ट, बीमारी का व्यवहार, मरीज की जेनेटिक टेस्ट रिपोर्ट, कोलोनोस्कोपी की पहले की और आगामी तिथि, टीकाकरण का ब्यौरा, हड्डी की स्थिति और मरीज के आहार की जानकारी।
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देशभर के अस्पतालों को जोड़ा
डॉ. विशाल ने बताया कि इस प्रयास को देशभर में सफल बनने के लिए क्राउन कोलाइटिस फाउंडेशन के सहयोग से सभी अस्पतालों को जोड़ा गया है। ऐसा इसलिए ताकि पीजीआई या देश के किसी कोने के मरीज के किसी दूसरे शहर के अस्पताल में जाने पर उसे इलाज के लिए ज्यादा इंतजार न करना पड़े।
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