चंडीगढ़ में पीजीआई चौक (भ्रष्टाचारी चौक) के अच्छे दिन आने वाले हैं। नगर निगम ने चौक को फिर से खोदकर काम शुरू कर दिया है। पानी की पाइप लाइन के ऊपर अब कंक्रीट का चेंबर बनाया जा रहा है। जिससे कि वाहनों का दबाव पाइप लाइन तक न पहुंचे। चेंबर का एक ढक्कन भी बनाया जाएगा। यदि पाइप लाइन टूटती भी है तो पूरी सड़क खोदने की बजाय ढक्कन खोलकर पाइप लाइन को जोड़ा जा सकेगा। निगम के एक्सईएन हरीश सैनी ने बताया कि इस पूरी कवायद में लगभग पांच से छह लाख रुपये का खर्च आएगा। बता दें कि शहर में पेयजल सप्लाई के लिए पीजीआई चौक पर ज्वाइंट बनाया गया है।
ज्वाइंट गोलचक्कर से सटा हुआ है। वहां से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण दबाव पाइप लाइन तक पहुंचता है और लाइन बार बार टूट जाती है। आलम यह है कि बनने के सप्ताह भर में ही पाइप लाइन फिर टूट जाती थी। लोगों ने इससे राहत पाने की उम्मीद ही छोड़ दी थी, लेकिन अधिकारी चेते और इस चौक का स्थायी समाधान करने का मन बनाया है। पाइप लाइन के दोनों ओर कंक्रीट की दीवार बनाई जाएगी। उसके ऊपर कंक्रीट का एक मजबूत ढक्कन लगाया जाएगा। इससे कि वाहनों से आने वाले दबाव को ढक्कन रोक ले और पाइप लाइन पर जोर न पड़े। वहीं ढक्कन बनने के बाद किसी कारण से पाइप लाइन टूटती है तो उसे बिना की समस्या के तत्काल बनाया जा सके।
दो साल में 15 बार खोदा, 9 लाख बहाए
पीजीआई चौक का आलम यह था कि दो साल में निगम के अधिकारियों ने 15 से अधिक बार पाइप लाइन को बनाया था। इस काम लगभग 9 लाख से ज्यादा रुपये लग गए थे, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका था। स्थायी समाधान न होने से वहां से गुजरने वाले लोगों के अलावा एंबुलेंस से जाने वाले मरीजों को भी काफी समस्या होती थी। लोगों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वहीं अधिकारी भी आचार संहिता की बात कहकर लोगों को टालते रहे।
अमर उजाला ने उठाया मुद्दा तो आनन-फानन में बनी सड़क
अमर उजाला ने 19 अप्रैल के अंक में ‘दो साल में 15 बार खुदाई, बहाए नौ लाख, फिर भी गड्ढे से होकर गुजर रहे शहरवासी’ शीर्षक से शहर की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उसके बाद आनन-फानन में निगम ने गड्ढा तो बंद कर दिया लेकिन उसका स्थायी समाधान नहीं किया। इस समस्या के निराकरण को लेकर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पाइप लाइन काफी पुरानी है। उसे बदलना ही होगा, लेकिन उसके लिए लगभग 3 दिन तक पेयजल आपूर्ति ठप रहेगी। साथ ही सड़क मार्ग भी अवरुद्ध होगा। वहीं, 15 लाख रुपये में कोई ठेकेदार इस टेंडर को लेने को तैयार नहीं है।
पाइप लाइन के दोनों ओर कंक्रीट की दीवार और ऊपर ढक्कन लगाकर वाहनों से आने वाले दबाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। काफी हद तक इससे पाइप पर दबाव नहीं बनेगा। पाइप बदलने में लगभग 35 से 40 लाख का खर्चा आएगा। इसमें काफी समय लग जाता।
- हरीश सैनी, एक्सईएन, नगर निगम