जन्म के समय जिन बच्चों के होंठ और तालू कट जाती है, उनके लिए पीजीआई एक वरदान साबित हो रहा है। यहां हर साल ऐसे 300 बच्चों का इलाज किया जाता है। डॉ. अशोक उत्रेजा ने बताया कि पीजीआई इस क्षेत्र में एक मॉडल चिकित्सा इंस्टीट्यूट है। इसमें आरथोडाटिक्स, प्लास्टिक सर्जन, डाइटिशियन, स्पीच थैरेपिस्ट मिलकर काम करते हैं।
डाक्टरों ने बताया कि इस इलाज में बहुत ही कम खर्चा आता है। स्माइल प्रोजेक्ट का इसमें काफी सहयोग है। सर्जरी का खर्चा उनकी ओर से उठाया जाता है। इस दिशा में हो रहे चिकित्सा परिवर्तन और अपडेट के लिए पीजीआई का ओरल हेल्थ साइंस सेंटर, इंडियन सोसायटी ऑफ क्लेफ्ट लिप प्लेट व कार्नियोफैशियल एनोमैलीस 15वीं एनुअल कांफ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है। जो 25 से लेकर 27 मार्च तक आयोजित होगी।
हजार में एक ऐसा बच्चा लेता है जन्म
पीजीआई की एक स्टडी के मुताबिक हजार बच्चे में एक बच्चा ऐसा जन्म लेता है। यही फ्रीक्वेंसी पूरे वर्ल्ड में रिकॉर्ड की गई है। लड़कों में कटे होंठ और तालू के केस ज्यादा देखे जाते हैं। जिन बच्चों में यह समस्या आती है, उन बच्चों का वजन ढाई से तीन किलो के बीच होता है। यह स्टडी वर्ष 2009-2010 में एक जनवरी से 31 दिसंबर के बीच की गई थी। इसमें 49215 न्यू बोर्न बेबी को शामिल किया गया था।
इस तरह से होता है
शिशु का विकास गर्भ में होता है। विकास के दौरान गर्भ में मुंह और नाक के बीच जगह रह जाने की वजह से ऐसा होता है। आमतौर पर जब मुंह पूरे बनने के समय पर आता है तो ये जगह दाएं-बाएं होंठ और तालू के मिलने पर बंद हो जाता है। जब यह जगह पूरी तरह बंद न हो तो नवजात शिशु कटे होंठ व तालू के साथ जन्म लेता है। कटा होंठ ऊपर वाले होंठ और नाक के तल के पूरा न जुड़ने से होता है। यह लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में ज्यादा होता है।
ये हो सकते हैं संभावित कारण
इसका सही कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्टडी में पाया गया है कि आनुवांशिक, गर्भावस्था के शुरुआत में बीमारी, कुछ रसायनों के दुष्प्रभाव, मां के धूम्रपान, शराब का सेवन, आहार में कमी, स्टेराइड थैरेपी, वायरल इंफेक्शन, एक्सरे-किरण, मिर्गी उपचार की दवाएं लेना, मानसिक दबाव व गर्भवती मां की बढ़ती हुई उम्र।
ऐसे हो सकता है बचाव
इस बारे में कम ही पता लग पाया है, लेकिन कुछ शोधों के अनुसार मल्टीविटामिन्स जिसमें फोलिक एसिड नाम का तत्व शामिल है, यह गर्भाधान के पहले और कम से कम दो महीने बाद तक लेने से कुछ हद तक बचाव किया जा सकता है। जो महिलाएं गर्भवती हैं या गर्भाधान की सोच रही हैं तो उन्हें धूम्रपान व मदिरापान न करने की सलाह दी जाती है। जो महिलाएं काफी समय से बीमारी की दवाएं ले रही हैं, जैसे मिर्गी तो उन्हें गर्भधारण से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जिन परिवारों में कटे होंठ व तालु की पूर्व घटना हो चुकी है तो उन्हें डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।