दो वर्गों में बांटकर किया शोध
प्रो. आशु रस्तोगी ने बताया कि शोध में शामिल इन 12 हजार लोगों में चंडीगढ़ पीजीआई के 9 हजार और रोहतक के 3 हजार मरीज शामिल थे। इनमें महिलाओं की संख्या 5 हजार और पुरुषों की 7 हजार थी। सभी मरीजों को दो वर्गों में बांटा गया। एक वर्ग में पियोग्लिटाजोन दवा लेने वालों को रखा गया और दूसरे में अन्य दवा का सेवन करने वालों को। सभी मरीजों का चार साल तक लगातार फॉलोअप किया गया लेकिन दोनों ही वर्गों में शामिल मरीजों में यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर का कोई लक्षण नहीं मिला। इस शोध के दौरान यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर के साथ ही अन्य प्रकार के कैंसर के खतरे का भी आकलन किया गया लेकिन अन्य कैंसर भी सामान्य अनुपात में मिले। इससे साबित होता है कि इस दवा के सेवन से कैंसर का खतरा नहीं है।
पियोग्लिटाजोन का उपयोग व लाभ
टाइप-2 मधुमेह के कारण होने वाले उच्च रक्त शर्करा के स्तर के इलाज के लिए उचित आहार और व्यायाम के साथ पियोग्लिटाजोन का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग अकेले या अन्य दवाओं जैसे इंसुलिन, मेटफॉर्मिन या सल्फोनील्यूरिया एजेंटों के साथ किया जा सकता है। पियोग्लिटाजोन आपके शरीर को इंसुलिन का बेहतर उपयोग करने में मदद करके काम करता है। जेनेरिक दवा होने के कारण यह आसानी से मरीजों के पहुंच में है।
क्या है यूरिनरी ब्लैडर कैंसर
यूरिनरी ब्लैडर कैंसर एक प्रकार का यूरोलॉजिकल मैलिग्नेंसी है, जो मूत्राशय के अंदर मौजूद कोशिकाओं में शुरू होता है। मूत्राशय का कैंसर तब शुरू होता है, जब मूत्राशय बनाने वाली कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर होने लगतीं हैं। ब्लैडर कैंसर के लक्षणों का अगर जल्दी पता चल जाए तो शुरुआती निदान और उपचार हो सकता है।