पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के एएमएस डॉ. अरुण बंसल और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक की सदस्य डॉ. सौम्यता त्रिपाठी का कहना है कि खांसी की दवा तभी सुरक्षित होती हैं जब उन्हें बाल रोग विशेषज्ञ उचित कारण, मात्रा और अवधि के अनुसार दें।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों में कफ सिरप के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए जबकि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को दवा केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दी जा सकती है। इस निर्देश का समर्थन पीजीआई, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक के विशेषज्ञों ने भी किया है।
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पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के एएमएस डॉ. अरुण बंसल और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक की सदस्य डॉ. सौम्यता त्रिपाठी का कहना है कि खांसी की दवा तभी सुरक्षित होती हैं जब उन्हें बाल रोग विशेषज्ञ उचित कारण, मात्रा और अवधि के अनुसार दें। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन भी कहती है कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की दवा नहीं दी जानी चाहिए।
डॉ. सौम्यता के अनुसार आजकल बाजार में कफ सिरप और ड्रॉप्स दोनों उपलब्ध हैं लेकिन माता-पिता को कभी भी खुद से बच्चों को दवा नहीं देनी चाहिए। अधिकतर खांसी वायरस जनित होती है और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। उन्होंने कहा कि खांसी कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की रक्षा प्रणाली का हिस्सा है। यदि खांसी के साथ सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक बलगम या तेज बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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मानक तो हैं लेकिन पालन नहीं
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के एकेडमी ऑफ मेडिकल प्रैक्टिशनर के नेशनल चेयरमैन डॉ. रमणीक सिंह बेदी का कहना है कि इस मामले में ड्रग निर्माता, रेगुलेटरी अथॉरिटी, केमिस्ट, डॉक्टर और मरीज सभी जिम्मेदार हैं। दवाओं की सुरक्षा के लिए नियम तो हैं लेकिन उनकी निगरानी ढीली है। उन्होंने बताया कि दुकानदार को मरीज से प्रिस्क्रिप्शन की एक प्रति लेकर ही दवा देनी चाहिए लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता। न तो दुकानदार पर्ची रखते हैं और न ही मरीज बिल। ऐसे में किसी अनहोनी की स्थिति में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि दवा कहां से खरीदी गई थी। उन्होंने चेताया कि खोली हुई दवा की शीशी संक्रमण फैला सकती है इसलिए उसे सुरक्षित रूप से नष्ट करना चाहिए।