एमडीआर टीबी आप भी जान लें
टीबी के लिए सबसे अधिक प्रभावकारी दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए तो इसे मल्टीड्रग रजिस्टेंस टीबी या एमडीआर टीबी कहते हैं। ऐसे मरीजों पर दवा असर नहीं करती।
पेट की टीबी को जानिए
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल टीबी पेट के पेरिटोनियम और लिंफ में होती है। इसमें माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस का संक्रमण हो जाता है। देश में छोटी आंतों में होने वाले इस तरह के टीबी मरीजों की संख्या कुल टीबी के मरीजों की कुल संख्या का 5 से 9 प्रतिशत है। टाइफाइड बुखार के बाद भारत में आंतों में होने वाली यह दूसरी सबसे आम बीमारी है। मधुमेह और एचआईवी पॉजिटिव रोगियों में इस बीमारी के होने का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है।
विश्व में टीबी उन्मूलन पर काफी काम हो रहा है। ऐसे में एमडीआर टीबी के मरीजों पर दवा के रजिस्टेंस की जानकारी देने से संबंधित शोध बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी खास बात यह है कि हमने एक ही प्रक्रिया में दो बेहद महत्वपूर्ण चीजों की जानकारी प्राप्त करने में सफलता प्राप्त कर ली है। इसके कारण यह शोध विश्वभर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। - डॉ. एसके सिन्हा, पीजीआई गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग।