कोरोना के मरीजों के इलाज में जुटे पीजीआई के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ जाने-अनजाने इस महामारी की चपेट में आ रहे हैं। अपने सहयोगियों को संक्रमित होता देखकर भी इनका मनोबल कमजोर नहीं हो रहा। इतना ही नहीं संक्रमित होने वाले कोरोना वीर भी इस संक्रमण को मात देकर दोबारा मैदान में पहुंच रहे हैं।
उनका कहना है कि कोरोना से जंग उसके खात्मे तक जारी रहेगी। पीजीआई प्रशासन का मानना है कि अपने निडर, निर्भीक, ईमानदार और मजबूत इरादे वाले इन योद्धाओं के बल पर भी वह गंभीर मरीजों की जान बचाने में सफल हो रहा है। पीजीआई में अब तक डॉक्टर और स्टाफ के करीब 45 सदस्य कोरोना की चपेट में आ चुके हैं।
कोरोना से बचाव का आसान तरीका.. खुद पर बीमारी के तनाव को हावी न होने दें: भावना
पीजीआई नर्सिंग ऑफिसर भावना 22 जून को संक्रमण की चपेट में आई। उस दौरान वह इमरजेंसी एरिया में ड्यूटी कर रही थीं। रेफर मरीज के संपर्क में आने के बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। भावना ने बताया कि भर्ती होने के चौथे दिन के बाद से उन्होंने तेजी से रिकवरी करना शुरू किया। उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास के बल पर ही उन्होंने कोरोना को मात दिया।
भर्ती होने के दौरान उनके माता-पिता और भाई ने उनका मनोबल बढ़ाया। पैरामेडिकल स्टाफ होने के कारण उन्हें संक्रमण और उसके बचाव के तरीके बखूबी मालूम थे। उन्होंने बताया कि कोरोना से बचाव का सबसे आसान तरीका है खुद पर इस बीमारी के तनाव को हावी न होने देना। अपने मजबूत इरादों के बल पर ही भावना ने करोना को मात देकर 15 जुलाई से फिर से ड्यूटी जॉइन कर ली है।
पॉजिटिव आई तो पिता ने बढ़ाया हौसला, ठीक होकर दे रही हूं ड्यूटी: गुरविंदर कौर
पीजीआई की नर्सिंग ऑफिसर गुरविंदर कौर 25 अप्रैल को इमरजेंसी मेडिसिन में कोरोना संक्रमित हुए। गुरविंदर ने बताया कि वह अपने परिवार से दूर हॉस्टल में रहती हैं। उनके पिता हरियाणा पुलिस में कार्यरत हैं। बचपन से मिली परवरिश के कारण ही वह किसी भी स्थिति में डरती नहीं है।
गुरविंदर ने बताया कि जब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की सूचना उनके पिता को मिली तो उन्होंने कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। इससे कुछ भी नहीं होगा, तुम युवा हो और इस बीमारी को आसानी से मात दे सकती हो। उनकी वो बातें सुनकर मुझे काफी बल मिला। उसके बाद मैंने अपने खानपान और योग, मेडिटेशन, एक्सरसाइज के जरिए कोरोना को आसानी से मात देने में सफलता हासिल की। ठीक होने के बाद 28 मई से फिर से पीजीआई के एडवांस ट्रामा सेंटर में ड्यूटी शुरू कर दी है।
डॉक्टर से लेकर पेंटर तक आ चुके हैं चपेट में
कोरोना के मरीजों का इलाज करने के दौरान पीजीआई के डॉक्टर से लेकर पेंटर तक संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इसमें नर्सिंग ऑफिसर, हॉस्पिटल अटेंडेंट, सेनेटरी ऑफिसर, किचन वर्कर, फिजियोथेरिपिस्ट, जूनियर लैब टेक्नीशियन, प्रोजेक्टर स्टाफ, सीनियर रेजिडेंट, अकाउंटेंट आदि शामिल हैं।
धीरे-धीरे संक्रमण ने बिछाया जाल
पीजीआई में मार्च से 5 अगस्त के बीच जिस क्रम में संक्रमण का विस्तार हुआ उसमें शुरुआती दौर काफी धीमा था। मार्च में पीजीआई का केवल एक स्टाफ कोरोना संक्रमित हुआ, जबकि जुलाई में इसकी संख्या 30 पर पहुंच गई। इस दौरान मई ऐसा माह रहा जब पीजीआई में संक्रमण का स्तर शून्य था। इस 30 दिनों के अंदर पीजीआई का कोई डाक्टर और स्टाफ कोरोना संक्रमित नहीं हुआ। सैकड़ों संक्रमित मरीजों के बीच 24 घंटे इलाज करने वाले डॉक्टर और स्टाफ की सुरक्षा के पीछे पीजीआई की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था ही मुख्य कारण है।
रेफर मरीजों ने बढ़ाया खतरा
कोरोना महामारी के कारण अस्पतालों की ओपीडी बंद होने के बाद पीजीआई की इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर पर मरीजों का दबाव बढ़ गया। ऐसी स्थिति में चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और अन्य प्रदेशों से रेफर होने वाले मरीजों से पीजीआई में संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ा। चौंकाने वाली बात यह है कि कोरोना की जांच रिपोर्ट नेगेटिव होने के बावजूद भी पीजीआई में इलाज के दौरान कई रेफर मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई जिसके कारण दर्जनों डाक्टर और स्टाफ संक्रमण की जद में आ गए।
कोरोना से इस जंग में पीजीआई का प्रत्येक स्टाफ जान की परवाह किए बिना जुटा हुआ है। पीजीआई प्रशासन को अपने कोरोना वीरों पर गर्व है। उनकी ही बदौलत कोरोना के मरीजों को नया जीवन मिल रहा है।
- प्रो. जगतराम, पीजीआई डायरेक्टर