डॉक्टरों ने बताया कि जिन प्रोटीन को हमने खोजा है, उनके सहयोग के साथ पुरानी दवाओं जैसे क्लोरोक्वीन, एच1 एन1 वायरस के लिए दी जानी वाली दवाओं के साथ हम पॉजीटिव मरीज पर इसका शोध करके मरीज को ठीक करने की कोशिश करेंगे।
टारगेटेड साइट आइडेंटिफाई किया: डॉ. मेधी
प्रो. विकास मेधी ने बताया कि जबसे यह नया वायरस आया है, हम इसके फैलने के बाद से इसको खत्म करने के लिए मैकेनिज्म तैयार करने में जुट गए थे कि कौन सा मैकेनिज्म या प्रोटीन इस वायरस को खत्म कर सकता है। आखिर में हमने टारगेटेड साइट आइडेंटिफाई कर लिया है। इन प्रोटीन पर इन-सिलिको ड्रग डिजाइनिंग के जरिए ड्रग टारगेट मॉलिक्यूल आइडेंटिफाई किया गया है। इन-सिलिको ड्रग डिजाइनिंग वह प्रोसेस है जिसमें बॉयो इनफार्मेटिक्स टूल के रूप में इस्तेमाल कर ड्रग टारगेट मॉलिक्यूल को आइडेंटिफाई किया जाता है।
सात स्ट्रेन होते हैं कोरोना वायरस के
डॉ. विकास मेधी के अनुसार ह्यूमन कोरोना वायरस के सात स्ट्रेन होते हैं। 229ई, एनएल 63, ओसी 43, एचकेयू 1, एमईआरएस-सीओ वी, एसएआरएस-सीओ वी और 2019-एन सीओवी से वायरस फैलता है। यह रेस्पेरेटरी ट्रैक को जकड़ लेता है, जिसमें लोअर और अपर रेस्परेटरी ट्रैक शामिल होते हैं।