आल इंडिया पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने पेट्रोल पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की है। उन्होंने एक देश, एक रेट का नारा देते हुए तमाम राज्यों में वैट केअंतर को खत्म करने की भी मांग की है। एसोसिएशन ने इस संबंध में वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा से मुलाकात की।
एसोसिएशन के प्रधान अजय बंसल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि शराब और पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट से राज्यों को काफी राजस्व मिलता है। इसीलिए सभी राज्यों ने केंद्र सरकार पर दबाव डालकर इन चीजों को जीएसटी से बाहर रखने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के वित्तमंत्री वैट की दरें तय करें, ताकि देश भर में पेट्रोल पदार्थों के रेट एक समान हो सकें।
उन्होंने कहा कि वैट में अंतर के चलते देश के 53 हजार पेट्रोल पंपों में से 25 प्रतिशत बंदी की कगार पर पहुंच चुके हैं। क्योंकि उनके नजदीक ही दूसरे पेट्रोल पंप पर सस्ते उत्पाद मिल जाते हैं। एसोसिएशन इसके लिए सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों से मुलाकात करेगी।
अभी तक आठ राज्य एक देश, एक रेट पर सहमति जता चुके हैं। 15 जुलाई को नई दिल्ली में होने वाली सभी राज्यों के सीएम की मीटिंग में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। बंसल ने कहा कि रिफाइनरी से डिपो तक लोडिंग चार्ज में अंतर को ऑयल कंपनियों से ठीक करने को कहा गया है। पंजाब पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के प्रधान संदीप सहगल ने पेट्रोल पंपों पर लूट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दस दिनों में पंद्रह वारदातें हो चुकी हैं। एडीजीपी आईपीएस सहोता से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई है।