हरियाणा में कर्मचारियों की भर्तियों से जुड़े विवाद कम होने के नाम नहीं ले रहे हैं। बुधवार को स्टेनोग्राफर के 377 पदों की भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताओं के आरोप वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भर्ती से जुड़ा रिकॉर्ड तलब कर लिया है। इसके साथ ही हरियाणा सरकार और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। बुधवार को हाईकोर्ट में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा निकाली गई 377 पदों की भर्ती को चुनौती दी गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस भर्ती के लिए परीक्षा 2 साल पहले ली गई थी और अब स्किल टेस्ट लिया गया। स्किल टेस्ट के बाद दस्तावेजों की जांच के लिए बुलाया गया। भर्ती के दौरान न तो कहीं पारदर्शिता दिखाई दी और न ही आवेदकों को यह बताया गया कि आखिर किस आधार पर लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे पहले की भर्तियों की प्रक्रिया और इस भर्ती की प्रक्रिया में भी काफी फर्क है। साथ ही भर्ती के लिए जारी विज्ञापन को भी कुछ याचिकाओं में चुनौती दी है।
इन याचिकाओं में कहा गया है कि आरक्षण की जो व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने दी थी उसके अनुसार आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। लेकिन इस भर्ती में आर्थिक पिछड़ा वर्ग व अन्य प्रकार के आरक्षण को मिला लिया जाए तो कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा पार कर जाता है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार और कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब कर लिया है। इसके साथ ही आयोग को अगली सुनवाई पर भर्ती से जुड़ा रिकार्ड हाईकोर्ट में पेश करने के आदेश भी जारी किए हैं।
हालांकि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को फिलहाल अस्वीकार करते हुए कहा है कि वे केस का रिकार्ड देखने के बाद ही आगे फैसला लेंगे।