प्रमोशन और मेडल के लिए हरियाणा पुलिस अफसरों द्वारा किए जा रहे एनकाउंटर को हत्या करार देते हुए इन मामलों की सीबीआई जांच की अपील की गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा गया है कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट नाम से चमक कर प्रमोशन के लिए ऐसा किया जाता है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
सोनीपत निवासी दलबीर सरोहा ने एडवोकेट आनंद सिंह के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए फर्जी एनकाउंटरों की सीबीआई जांच की अपील की है। याचिका में 2005 में हुए युद्धवीर एनकाउंटर सहित आधा दर्जन एफआईआर को शामिल किया, जिसमें एनकाउंटर को फर्जी बताया गया। युद्धवीर मामले का हवाला देते हुए याची ने कहा कि युद्धवीर को दिल्ली के नरेला में झज्जर पुलिस ने पकड़ा था और झंडा चौक पर गोली मार दी।
इसके बाद बॉडी को गाड़ी में डालकर ले गए और बहादुरगढ़ के बल्लौर में एनकाउंटर दिखा दिया। याची ने कहा कि कहानी कुछ ऐसी है, जिस पर विश्वास करना मुश्किल है। एक कार में युद्धवीर और गोपाल थे, जिसका पीछा तत्कालीन डीएसपी अरुण सिंह नेहरा 40 लोगों की टीम के साथ कर रहे थे। इस दौरान नेहरा ने उनकी गाड़ी के सामने अपनी गाड़ी लगाई और गाड़ी रुकने के बाद युद्धवीर ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद वह खेतों की तरफ भागा और सभी लोग उसके पीछे चल दिए।
एक किलोमीटर पीछा करने के बाद गोली चलाई गई और आखिर युद्धवीर मारा गया। याची ने इस पूरी कहानी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नेहरा ने क्या नरेला से बहादुरगढ़ के बल्लौर तक दोनों का पीछा किया और इस दौरान कहीं भी उन्हें रोकने में कामयाब नहीं हुए? क्यों आखिर 40 लोगों की टीम युद्धवीर के पीछे भागी और गोपाल को गाड़ी लेकर जाने दिया गया? नरेला में यदि गोली मारी गई थी तो एनकाउंटर बल्लौर में क्यों दिखाया गया? आखिर रास्ते में कहीं पर भी पुलिस ने युद्धवीर को इंटरसेप्ट क्यों नहीं किया?
यह सवाल उठाने के साथ ही याची ने सोनीपत के अनिल भगत और सुनील कुमार एनकाउंटर के साथ ही कई एफआईआर हाईकोर्ट को सौंपी, जिनमें फर्जी एनकाउंटर होने की बात कही गई। याची ने कहा कि प्रमोशन और मेडल के लिए यह सब किया जाता है और ऐसे में इसे एक्स्ट्रा कांस्टीट्यूशन किलिंग माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की कि इन सभी एनकाउंटरों की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, क्योंकि अपराधी करार देने, र न्याय देने और किसी की जिंदगी लेने का हक केवल न्यायालय को है।
वह भी पूरी तरह से सभी पक्षों को सुनने के बाद। सुप्रीम कोर्ट भी फेक एनकाउंटर को कानून की रक्षा करने वालों की ओर से नृशंस हत्या करार दे चुका है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद याचिका पर हरियाणा सरकार और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।