रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी(रेरा) के गठन के तीन साल बाद भी एड्ज्युडिकेटिंग ऑफिसर की नियुक्ति न होने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से इस बारे में जवाब तलब कर लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए गुरुग्राम निवासी अमित बंसल ने हाईकोर्ट को बताया कि रियल एस्टेट से जुड़े विवादों का निपटारा करने के लिए 2016 में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया गया था। इसमें पीड़ितों को मुआवजे के लिए प्रावधान है और दो तरह के मुआवजे दिए जाते हैं। पहले प्रकार में प्रॉपर्टी के लिए किए गए भुगतान को वापस दिया जाता है और उस पर ब्याज आदि दिया जाता है, जो रेरा के सदस्य देते हैं। दूसरे प्रकार का मुआवजा हैरासमेंट आदि के लिए दिए जाने का प्रावधान है जिसका अधिकार केवल एड्ज्युडिकेटिंग ऑफिसर को ही है।
याची ने कहा कि इतना अहम पद होने के बावजूद भी यह पद रेरा के गठन से लेकर अब तक खाली पड़ा है। याची ने कहा कि इस अधिकारी के न होने के चलते लोगों को हैरासमेंट के लिए मुआवजा नहीं मिल पा रहा है जो लोगों के साथ अन्याय है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद हरियाणा सरकार से इस बारे में जवाब मांगा। हरियाणा सरकार के वकील ने हाईकोर्ट से इस बारे में जवाब के लिए समय दिए जाने की अपील की। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर इस बारे में सरकार का पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।