घटनाक्रम पर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया कि जो अधिकारी चुनाव प्रक्रिया का संचालन कर रहा था, उन्हें निर्धारित चुनाव से एक दिन पहले मनमाने ढंग से स्थानांतरित कर दिया गया। उनके स्थान पर हरियाणा कैडर से आए नए अधिकारी ने कार्यभार संभाला और आते ही मेयर पद के एक उम्मीदवार को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत तौर पर पेश होकर नामांकन वापसी के सत्यापन के लिए कहा गया। यह भी बताया गया कि चुनाव के दिन ही अचानक पीठासीन अधिकारी के खराब स्वास्थ्य के आधार पर एमसी परिसर में पार्षदों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि एक दिन पूर्व ही चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट में चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी।
तीन दिन में चार सुनवाई, फिर भी निराशा हाथ आई
भाजपा व आम आदमी पार्टी मेयर व अन्य पदों पर मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले कोई समीकरण न बिगड़े इसके लिए मंगलवार को चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर लक्की की पार्षद जसवीर सिंह बंटी को अवैध हिरासत में बताते हुए मुक्त करवाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। इस पर हाईकोर्ट ने रात एक बजे सुनवाई कर प्रशासन को नोटिस जारी किया था। हालांकि 17 जनवरी को शाम पांच बजे सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया। 17 जनवरी को फिर से एक याचिका दाखिल करते हुए चुनाव पारदर्शी व निष्पक्ष हों इसे सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया था और चुनाव की वीडियोग्राफी का आदेश दिया था। इसके बाद गुरुवार को चुनाव न होने के कारण फिर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इस मामले में भी हाईकोर्ट ने बिना कोई राहत दिए केवल यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। ऐसे में तीन दिन और चार सुनवाई के बाद भी आप-कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा।