केंद्र सरकार ने पिछले तीन साल में हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिए नेशनल स्वास्थ्य मिशन के तहत 1562.14 करोड़ की ग्रांट दी है। बावजूद इसके राज्य के अस्पतालों में डाक्टर, नर्स और स्टाफ मौजूद नहीं हैं। केंद्र सरकार द्वारा ग्रांट के बारे में दी गई जानकारी को आधार बनाते हुए याची एडवोकेट प्रदीप रापड़िया ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार को इसके लिए जिम्मेदार बताया। हाईकोर्ट ने जवाब को रिकार्ड पर लेकर सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिका दाखिल करते हुए कैथल के गांव बालू निवासी कुछ वृद्ध, दिव्यांग व महिलाओं ने हाईकोर्ट से स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध करवाने की अपील की थी। याचिका में बताया गया था कि गांव बालू के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कुल 25 स्वीकृत पद हैं जिनमें से 22 खाली हैं। तहसील स्तर पर अस्पताल में डाक्टरों के 8 में से 6 पद खाली हैं और नर्स एक भी नहीं है। वहीं, जिला स्तर पर मौजूद मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भी डाक्टरों के 36 पद खाली हैं।