हरियाणा में अब आईवीएफ के माध्यम से दूसरा बच्चा चाहने वाली दंपत्तियों को पहले जिला समुचित प्राधिकारी से अनुमति लेना जरूरी होगा। जिला समुचित प्राधिकरण में उपायुक्त व सीएमओ शामिल होते हैं। यह निर्णय लिंगानुपात में सुधार के लिए गठित राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की बैठक में लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि लिंगानुपात में सुधार के लिए आईवीएफ केंद्रों पर सख्ती जरूरी है।
गर्भपात के खिलाफ उठाए जाएंगे सख्त कदम
अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अवैध गर्भपात के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। इसमें संलिप्त डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द कर कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं। ऐसे ही एक मामले में अवैध गर्भपात के आरोप में नूंह के दो नर्सिंग होम को सील कर दिया गया। वहीं, सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को अवैध गर्भपात गतिविधियों में लिप्त बीएएमएस डॉक्टरों व झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने और हर हफ्ते एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।