चंडीगढ़ पेरीफेरी के तीन गांवों में शामलात भूमि रसूखदारों को बेचने और हजारों अवैध रजिस्ट्रियों के जरिए भूमि पर अवैध कब्जे किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान, मामले की जांच में लगी एसआईटी ने अपनी सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी। इसके साथ ही एसआईटी ने हाईकोर्ट को बताया कि जांच में उसे रेवेन्यू अधिकारियों का सहयोग नहीं मिल पा रहा और न ही एसआईटी को रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया जा रहा है।
इस पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को आदेश दिए कि जो रेवेन्यू अधिकारी एसआईटी का सहयोग नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अगर जरूरत हो तो ऐसे अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब के वित्तायुक्त (रेवेन्यू) और मोहाली के डीसी को आदेश दिए कि वह खरड़ के एसडीएम को एसआईटी के साथ नोडल अधिकारी के तौर पर नियुक्त करें और तहसीलदार व नायब तहसीलदार को एसआईटी की जांच में शामिल होने के आदेश दें।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह अधिकारी जांच में सहयोग न करें तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने एसआईटी को ट्रांसलेटर भी उपलब्ध करवाने के आदेश दिए। उल्लेखनीय है कि एसआईटी की ओर से शुक्रवार को हाईकोर्ट में दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट में केवल दो लोगों के ही नाम हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि एसआईटी कुछ लोगों की ही जांच न करे बल्कि तीनों गांवों की जमीन की खरीद-फरोख्त में हुई धांधली की जांच करे। कोर्ट ने कहा कि अगर एसआईटी को कुछ भी गलत नजर आता है तो वह राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए कह सकती है। हाईकोर्ट ने एसआईटी को दो महीनों का समय देते हुए अगली रिपोर्ट 14 सितंबर से पहले दायर करने के आदेश भी दिए।