तीन वर्ष से भी अधिक समय तक ट्रांसफर फीस रखने और उसको बिना ब्याज के लौटाने पर उपभोक्ता फोरम ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। उपभोक्ता फोरम ने हाउसिंग बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह दो लाख पांच हजार 172 रुपये की राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज अदा करे। सेवा में कोताही के लिए 15 हजार रुपये मुआवजा भी अदा करना होगा।
यह निर्देश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-2 चंडीगढ़ ने सुनवाई के बाद दिया है। शिकायतकर्ता जसपाल सिंह और सतवंत कौर निवासी सेक्टर-10 डी चंडीगढ़ ने सेक्टर-9 चंडीगढ़ स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि सेक्टर-51 ए स्थित कैटेगरी एक में एक ड्वेलिंग यूनिट नीर कमल से रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटार्नी और सेल एग्रीमेंट के माध्यम से 31 दिसंबर 2004 को खरीदा।
शिकायतकर्ता ने हाउसिंग बोर्ड में नो ड्यूज सर्टिफिकेट का आवेदन किया। बोर्ड ने 21 दिसंबर 2012 को सर्टिफिकेट जारी किया। शिकायतकर्ता ने फ्लैट के ट्रांसफर के लिए दो लाख पांच हजार 172 रुापये ट्रांसफर फीस जमा कराई। पर्सोनल इंटरव्यू 29 अगस्त 2011 को हुआ। लेकिन शिकायतकर्ता के नाम पर फ्लैट ट्रांसफर नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी तो बोर्ड ने 7 अक्तूबर को सूचना दी कि जीपीए रूल के अनुसार उनका वह ड्वेलिंग यूनिट ट्रांसफर नहीं हो सकती।
हाउसिंग बोर्ड ने ट्रांसफर फीस चेक के माध्यम से लौटा दिए लेकिन उस पर तीन वर्ष तीन महीने और 10 दिनों का ब्याज नहीं दिया। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने उपभोक्ता फोरम में पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है। शिकायतकर्ता को फीस लौटा दी है।