विश्वास नहीं हो रहा है कि पीजीआई के डॉक्टर वास्तव में किसी के जीवन के साथ ऐसे खेल सकते हैं। मुझे लगता है कि बच्चे के माता-पिता ने अपनी सहमति नहीं दी होगी, यह असंभव है। इस तरह के व्यवहार के लिए डॉक्टरों पर शर्म आनी चाहिए और उन्हें इसके लिए दंडित किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं रमनदीप ने न्याय की उम्मीद भी जताई।
बता दें कि चंडीगढ़ पीजीआई में सांस की नली में बादाम फंसने से 11 महीने के रिवांश की मौत हो गई थी। मौत की वजह समय पर इलाज न मिलना बताया जा रहा है। इस मामले में पीजीआई चंडीगढ़ का कहना है कि परिजनों की ओर से ब्रोंकोस्कोपी की अनुमति नहीं मिलने से वह इलाज करने में असमर्थ थे। जबकि परिजनों और रिश्तेदारों का आरोप है कि पीजीआई के डॉक्टरों ने ब्रोंकोस्कोपी की अनुमति तो मांगी लेकिन साथ ही यह कहा कि इस प्रक्रिया में बच्चे की मौत हो सकती है।
इससे वह लोग घबरा गए और तुरंत अनुमति देने से मना कर दिया। परिवार में विचार-विमर्श हुआ और करीब एक घंटे के बाद डॉक्टरों को अनुमति देने का आग्रह किया। आरोप है कि उसके बाद डॉक्टर इलाज के लिए तैयार ही नहीं हुए। बच्चा दो अप्रैल को शाम छह बजे पीजीआई पहुंच गया था और तीन अप्रैल की सुबह छह बजे तक उसे इलाज नहीं मिला। इसके बाद उसने करीब सुबह साढ़े छह बजे दम तोड़ दिया। बच्चे के पिता ने इस मामले में पुलिस में शिकायत भी दी है।