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Chandigarh News: रॉक गार्डन को बचाने के लिए सड़क पर उतरे लोग, अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी

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चंडीगढ़। रॉक गार्डन में यूटी प्रशासन की कार्रवाई पर लोग सड़कों पर उतर आए हैं। शहर के लोगों ने शुक्रवार शाम रॉक गार्डन फेज-3 से सुखना लेक तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं और शहर की धरोहर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है जिससे चंडीगढ़ की पहचान खतरे में पड़ सकती है। अब लोग हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल यूटी प्रशासन ने कार्रवाई रोकी है।
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‘सेविंग चंडीगढ़’ अभियान के तहत निकाले गए विरोध मार्च में लोगों ने शहर की ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को बचाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के उस निर्णय पर सवाल उठाए, जिसमें कोर्ट ने वकीलों के लिए एक पार्किंग स्थल बनाने का आदेश दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि याचिकाकर्ता और फैसले लेने वाले एक ही पक्ष नहीं हो सकते। सेविंग चंडीगढ़ कोर कमेटी की सदस्य दीपिका गांधी, आरके गर्ग, पवेला बाली, अमृता सिंह, समिता कौर, अमनदीप सिंह और पद्मश्री नेकचंद की पोती प्रियंका सैनी ने प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि चंडीगढ़ का मूल मास्टर प्लान पूरी योजना और विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था और इसे संरक्षित रखना आवश्यक है।

रॉक गार्डन को संजोकर रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी
रॉक गार्डन न केवल एक स्थानीय धरोहर है, बल्कि विश्व स्तर पर एक कलात्मक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जाना जाता है। इसे संजोकर रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। -प्रियंका सैनी, नेकचंद की पोती और रॉक गार्डन फाउंडेशन की सदस्य
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नेकचंद जैसे विश्व प्रसिद्ध कलाकार का अपमान करना अनुचित है। यह सिर्फ एक पार्किंग स्थल के लिए किया जा रहा है। पेड़ों को काटा जा रहा है। नेकचंद, ली कार्बूजिए और एमएस रंधावा की विरासत को ठेस पहुंचाई जा रही है। -समिता कौर, पर्यावरणविद्
चंडीगढ़ को इसी तरह नष्ट किया गया तो पहचान खो देंगे
जल संरक्षण कार्यकर्ता अमनदीप सिंह ने कहा कि हरे-भरे पेड़ों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आरके गर्ग ने कहा कि अंधाधुंध आधुनिकीकरण की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अगर चंडीगढ़ को इसी तरह नष्ट किया जाता रहा, तो हम अपने शहर के असली पहचान को खो देंगे।
सार्वजनिक भागीदारी की मांग
विरोध प्रदर्शन में शामिल पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रंजीत पवार ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपनी धरोहर को बचाने के लिए यूनेस्को की मंजूरी की जरूरत पड़ती है। सार्वजनिक मंचों पर नागरिकों की भागीदारी के साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि वे विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखें। प्रदर्शन में मैक सरीन, योजना रावत, वर्णिका कुंडू समेत कई नामी बिजनेसमैन, वकील, एथलीट, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर आदि शामिल हुए।
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