चंडीगढ़। प्रशासन की ओर से बिजली के निजीकरण करने के मामले को लेकर चंडीगढ़ के लोगों में विरोध शुरू हो गया है। इसके मद्देनजर रविवार को सुबह सेक्टर-28, 52, किशनगढ़, न्यू पावर हाउस औद्योगिक क्षेत्र के निवासियों ने मिलकर सेक्ट-28 में निजीकरण के खिलाफ एक विरोध रैली आयोजित की गई।
इस रैली को संबोधित करते हुए कल्याण संघों के पदाधिकारियों में शैलजा शर्मा, लखविंदर सिंह, गुरमीत सिंह, ध्यान सिंह आदि ने कहा कि अगर चंडीगढ़ में बिजली का निजीकरण किया गया तो उन्हें फिर से मोमबत्तियां जलाकर गुजारा करना पड़ेगा। इसके लिए वह चंडीगढ़ की बिजली निजी हाथों में नहीं जाने देंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चंडीगढ़ की बिजली का नियंत्रण पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने जा रही है जो कि पूर्ण रूप से गलत है। इस दौरान हाथों में ''विभाग का निजीकरण बंद करो'' लिखी तख्तियां लिए हुए थे और लोगों को जागरूक करने के लिए नारे लगा रहे थे। इसके बाद एक सामूहिक मार्च निकाला गया।
इसी तरह शाम को सेक्टर-15 के पटेल मार्केट में लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर मार्च निकाला। सेक्टर-15ए और बी से होते हुए यह मार्च पटेल मार्केट के पास समाप्त हुआ। इस अवसर पर युवा किसान एकता, वाल्मीकि धर्म समाज चंडीगढ़, पेंडू संघर्ष समिति और तर्कसंगत सोसाइटी चंडीगढ़ और अन्य संगठनों की ओर से एक बड़ा विरोध मार्च निकाला गया। विरोध मार्च का नेतृत्व किसान एकता के अध्यक्ष कृपाल सिंह, किसान एकता मटका चौक के अध्यक्ष और सरपंच सतनाम सिंह टांडा और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरिंदर शर्मा ने किया।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ का बिजली विभाग पिछले कई सालों से हजारों करोड़ रुपये के मुनाफे में चल रहा है और सरकार इस मुनाफे वाले विभाग को सस्ते में बेचकर लोगों का पैसा निजी कंपनियों को कम कीमत पर सौंपना चाहती है। सरकार ने यह कदम उठाने से पहले शहरवासियों को विश्वास में लेना जरूरी नहीं समझा। चंडीगढ़ प्रशासन तानाशाही पर उतर आया है जिसका खामियाजा निकट भविष्य में लोगों को भारी बिजली बिल देकर भुगतना पड़ेगा।