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अमर उजाला अभियान : छात्र बोले- पटाखों को छोड़ दिवाली पर पारंपरिक दीयों से करें सजावट

Fri, 06 Nov 2020 06:32 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/मोहाली/पंचकूला
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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शहर के लोगों के बाद अब कॉलेजों के विद्यार्थी भी अमर उजाला अभियान ‘एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध’ में जुड़ रहे हैं। सेक्टर-36 स्थित एमसीएम डीएवी कॉलेज फॉर वुमन की युवा लड़कियों से बातचीत पर उन्होंने पटाखों के कई विकल्प बताए। इसके साथ ही शपथ ली कि इस बार पटाखे रहित दिवाली मनाएंगे और अपने आसपास के लोगों को भी इसे लेकर जागरूक करेंगे। छात्राओं ने बताया कि हम रचनात्मक तरीकों जैसे प्राकृतिक रंगों के साथ रंगोली और पारंपरिक दीयों से सजावट कर दिवाली मना सकते हैं। 

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दिवाली पर पर्यावरण का रखें ध्यान
दिवाली का त्योहार मतलब हर तरफ रोशनी और जगमगाहट का समय, लेकिन आजकल हम त्योहार में रस्मों के नाम पर पर्यावरण को गंदा कर रहे है। दिवाली पर पटाखों का धुआं और कचरा फैलाने से बचना है। इसकी जगह दिवाली के दिन पूरे घर में गेंदे के फूल की माला और आम के पत्तों के तोरण लगाकर सजावट कर सकते हैं। - प्रियांशी, एमसीएम-36 

पटाखों को न और मिट्टी के दीयों को कहे हां
हम पहले ही पर्यावरण प्रदूषण के इतने दुष्परिणाम भुगत रहे हैं। इस बार हम सभी को ईको फ्रेंडली दिवाली मनानी चाहिए। इसके लिए पटाखों को न कहें और घरों में मिट्टी के दीये जलाएं। इसके साथ ही ईको फ्रेंडली मूर्तियां इस्तेमाल करें। वहीं रंगोली बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें। -मुस्कान, एमसीएम-36 
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इस दिवाली पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था का करें उपयोग

इस बार दिवाली ईको फ्रेंडली मनाएं। इसके लिए पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए गेहूं के आटे, संतरे के छिलकों और नारियल के गोले में हम तेल के दीये जला सकते हैं। त्योहार के दिन पटाखे नहीं जलाने के साथ बिजली की खपत भी कम करें। लड़ियों की जगह दीयों का इस्तेमाल करें। -श्रुति सिंगला, एमसीएम-36 

पटाखों पर खर्च करने की बजाय कुम्हारों से खरीदें दीये
दिवाली पर मनोरंजन के लिए हमने पटाखों को भी रस्म मना दिया। पटाखों से न सिर्फ हम इंसानों बल्कि पशु-पक्षियों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इस बार हमें शपथ लेनी चाहिए कि हम पटाखों पर फिजूलखर्ची नहीं करेंगे। इसकी बजाय हम कुम्हार से मिट्टी के दीये खरीदकर दिवाली पर घरों को सजाएंगे। -गोपिका जिंदल, एमसीएम-36 

 स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का आधार
दिवाली के कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में हम सभी को शपथ लेनी चाहिए कि हम अपने आस-पास के लोगों को पटाखा-रहित दिवाली मनाने के लिए प्रेरित करेंगे। हमें याद रखना चाहिए स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ जीवन का आधार है। इस बार हमें दिवाली पटाखा रहित पारंपरिक तौर-तरीकों से मनानी चाहिए। -आंचल गर्ग, एमसीएम-36 

पटाखों जलाने की बजाय बच्चों को बांटे स्टेशनरी
यह धरती हमारी है, इसे हमें ही बचाना है। इस दिवाली प्रण लें बिना पटाखे दिवाली मनाना है। पटाखों पर पैसे खर्च करने की बजाय रुपये एकत्रित करके स्टेशनरी का सामान खरीदें और जरूरतमंदों को बांटे। कोरोना के कारण कई मजदूर लोगों का काम बंद हो गया है, जिससे उनके बच्चों की पढ़ाई में मुश्किलें आ रही हैं। -रिद्धि, एमसीएम-36 

जिम्मेदार नागरिक बनें और प्रदूषणमुक्त दिवाली बनाएं
दिवाली पर परिवार के साथ समय बिताएं। इस बार दिवाली पर नए कपड़े, व्यंजन, दीये और प्राकृतिक रंगों के साथ रंगोली बनाकर मनाएं। कोरोना  के दुष्परिणाम देखने बाद अब हमें भी जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए। इस बार घरों में पटाखे नहीं लेकर आएं और आसपास के लोगों को भी इसको लेकर जागरूक करें। -शगुन चौधरी , एमसीएम - 36 

 दिवाली पर रिश्तेदारों को दें पौधे
कोरोना  के बाद हमें सबक लेना चाहिए कि हम प्रदूषण फैलाने में कम से कम भागीदार बनें। इसलिए इस वर्ष दिवाली पर पटाखे खरीदने की बजाय पौधे खरीदें। रिशेतदारों को भी दिवाली भेंट में पौधे दें। पटाखे जलाने की बजाय सेलिब्रेशन के तौर पर हम पुराने क्रेयान से रंग-बिरंगी मोमबत्तियां बना जला सकते हैं। - रेणु बाला, एमसीएम-36

पटाखों से खराब हो सकते हैं कान

पटाखे जोरदार धमाका करते हैं जो तंदुरुस्त व्यक्ति के भी कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। कान के पर्दे खराब होने से मानवीय दिमाग पर विपरीत असर पड़ता है। इतना ही नहीं अगर कोई कोरोना का मरीज इस समय एकांतवास में अपना समय व्यतीत कर रहा है तो पटाखे चलाना उसके लिए भी ठीक नहीं है। - डॉ. संदीप, ईएनटी स्पेशलिस्ट, फेज छह सिविल अस्पताल

आंखों पर पड़ता है बुरा प्रभाव
अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों को ग्रीन दिवाली मनाने के लिए प्रेरित करें। अगर आंख में कभी हल्की चिंगारी या पटाखे का अवशेष लग जाता है तो हाथ से मसलें नहीं। सादे पानी से आंखों को धोएं और जल्दी से डॉक्टर को दिखाएं। दिवाली के बाद हुए प्रदूषण से आंखों में जलन की समस्या और भी बढ़ जाती है। डॉ. नयनसी सूद, आई स्पेशलिस्ट

दिवाली पर नहीं चलाऊंगा पटाखे

कोविड-19 के चलते जो हालात पैदा हुए हैं उसे देखते हुए मैं दिवाली पर पटाखे नहीं चलाऊंगा। इस बार अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ घर में बैठकर त्योहार मनाया जाएगा। मेरी लोगों से भी यही अपील है कि इधर-उधर जाने की बजाय घर में रहकर त्योहार मनाएं ताकि कोरोना से बचा जा सके।  -अंश, बलटाना।
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जरूरतमंदों की करें मदद

दिवाली पर पटाखे न जलाकर पर्यावरण बचाने का संदेश देंगे, ताकि पटाखों से होने वाला प्रदूषण कम किया जा सके। इस दिवाली सब लोग पटाखे चलाने की बजाय जरूरतमंदों की मदद करें, इससे देश का भला होगा। दिवाली खुशियों का त्योहार है और इसे खुशी-खुशी मनाना चाहिए। -प्रभलीन कौर, डेराबस्सी।

पटाखे न चलाकर पर्यावरण बचाएंगे

मैं दिवाली पर सिर्फ फुलझड़ी जलाया करती थी। इससे जो धुआं निकलता था उससे हमें भी परेशानी होती थी। इसलिए अब पर्यावरण को बचाने के लिए मैं यह संकल्प लेती हूं कि खुद पटाखे न चलाकर दूसरों को भी ग्रीन दिवाली मनाने के लिए जागरूक करूंगी। - स्मृति, निवासी कुमाऊं नगर, नयागांव 

पटाखों से होता है प्रदूषण
मेरी स्कूल टीचर हमें शुरू से ही दिवाली या अन्य खुशी के अवसर पर पौधे लगाने के लिए प्रेरित करती हैं। क्योंकि पटाखे चलाने से वायु प्रदूषण होता है। इसलिए मैं इस बार दिवाली में पटाखों पर पैसे खर्च करने की बजाय खुद पौधे लगाकर दूसरों को भी वितरित करूंगा। - पारस अरोड़ा, निवासी नयागांव 

दूसरों को करेंगे जागरूक
लोग दिखावा करने के लिए पटाखों पर जरूरत से ज्यादा पैसा खर्च कर वायु प्रदूषण करते हैं। अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में यह और भी हानिकारक हो सकता है। इसलिए मैं अपने दोस्तों और पड़ोसियों को पटाखे न चालने के लिए जागरूक करूंगा। - गौरव जयंत, निवासी जनता कॉलोनी 
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