प्रशासन ने कहा कि शहर में कोरोना वायरस के मामले खत्म नहीं हुए हैं। कई लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। विभिन्न संस्थाओं ने भी आगाह किया है कि इस बार अगर दिवाली पर पटाखे जलाए गए तो उससे होने वाला प्रदूषण कोरोना के मरीजों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य एडवाइजरी में कहा गया है कि पटाखों का प्रदूषण कोरोना से ठीक हो चुके लोगों के लिए बेहद हानिकारक है।
बुधवार को एनजीटी ने जारी किया था चंडीगढ़ को नोटिस
पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के लिए बुधवार को एनजीटी ने चंडीगढ़ को नोटिस जारी कर दिया। विभिन्न समूहों की ओर से दायर याचिकाओं में 30 नवंबर तक पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। एनजीटी ने इससे जुड़े मामलों की सुनवाई का दायरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बढ़ा दिया और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों को नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा कि सभी संबंधित राज्य व यूटी, जहां वायु गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है, वे ओडिशा और राजस्थान की तरह पटाखों की खरीद और बिक्री पर कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं। इसके बाद गुरुवार को दिल्ली समेत कई राज्यों ने पटाखों की बिक्री और जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया। दिल्ली के फैसले को देखते हुए शुक्रवार को चंडीगढ़ ने भी प्रतिबंध लगाने का फैसला ले लिया।
आदेश नहीं माना और जलाए पटाखे तो क्या मिल सकती है सजा
आईपीसी की धारा 188 के तहत सजा के दो प्रावधान हैं। पहला -अगर आप सरकार या किसी सरकारी अधिकारी की ओर से कानूनी रूप से दिए गए आदेश का उल्लंघन करते हैं, या आपकी किसी हरकत से कानून व्यवस्था में लगे शख्स को नुकसान पहुंचता है तो आपको कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।
वहीं, दूसरा अगर आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा आदि को खतरा होता है तो आपको कम से कम छह महीने की जेल या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। वहीं, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 से 60 के तहत भी अधिकतम दो वर्ष की सजा, जुर्माना या फिर दोनों लगाए जा सकते हैं।