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चौंकाने वाली बात आई सामने, नाक में जख्म के डर से कोरोना की जांच कराने से कतरा रहे लोग

Sat, 21 Nov 2020 05:06 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • अस्पताल में जांच कराने पहुंचे मरीजों ने बताया-लगता है डर
  • डॉक्टर बोले- प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, डरने की जरूरत नहीं
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। बहुत से लोग तो नाक में जख्म के डर से ही जांच कराने से कतराते हैं। लोग डरते हैं कि यदि जांच कराते समय जरा सी भी चूक हुई तो उनकी नाक में गंभीर जख्म हो सकता है। जबकि डॉक्टर इस डर को सिरे से नकारते हैं। वह मरीजों को समझाते भी हैं कि इसमें डरने की कोई बात नहीं है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है। लोग बिना डरे जांच कराएं और संक्रमण रोकने में मदद करें।

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ऐसे होता है रैपिड एंटीजन टेस्ट
इस टेस्ट के लिए नाक में एक पतली नली डालकर सैंपल लिया जाता है। नाक से लिए गए तरल को टेस्ट किट में डाला जाता है। ये किट थोड़ी ही देर में बता देती है कि व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित है या नहीं। ये किट उसी तरह होती है, जैसे प्रेग्नेंसी टेस्ट किट होती है। सैंपल डालने के बाद अगर दो रेड लाइन आती हैं तो इसका मतलब है कि पॉजिटिव है और अगर सिर्फ एक लाइन आती है तो मतलब व्यक्ति निगेटिव है।


पूरी तरह प्रशिक्षित स्टाफ की लगती है ड्यूटी
जीएमएसएच 16 में टेस्ट कराने आए कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें पता चला था कि नाक में नली डालने के दौरान कुछ लोगों को जख्म हो गया था। नाक से खून भी बहने लगा था। लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि यह पूरी तरह निराधार है। नमूने लेने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित स्टाफ को ही लगाया जाता है। ऐसे में किसी भी तरह की चूक का सवाल ही नहीं उठता। 
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शांत चित्त होकर नमूना दें: डॉक्टर सुखदेव सिंह
जीएमएसएच- 16 के पूर्व ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ सुखदेव सिंह का कहना है कि कोरोना जांच में नमूना देने की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है। इस दौरान कोई खतरा नहीं होता। मरीज यह ध्यान रखें कि यदि नाक में पहले से किसी तरह की परेशानी है तो उसकी जानकारी तकनीशियन को जरूर दें, ताकि वह स्वैब स्टिक से नमूना लेते समय सजग रहे। नाक की हड्डी टेढ़ी होने या नाक संबंधी किसी तरह की बीमारी में स्वैब लेने के दौरान थोड़ी परेशानी हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं होता कि अंदर गहरा जख्म हो जाए और स्थिति गंभीर हो जाए। नमूना देते समय घबराएं नहीं। बिना -डुले, शांत चित्त होकर नमूना दें। 
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