अवैध शराब की बिक्री के लिए बने आबकारी एक्ट की कमजोर धाराओं के कारण ही तस्करों के हौसले बुलंद हैं। यही वजह है कि शराब माफिया लोगों की जिंदगियों के साथ खेलने से गुरेज नहीं करता। हालात यह कि कच्ची शराब बनाने वाले अगर गिरफ्तार हो भी जाते हैं तो महज 2-4 दिन में उनकी जमानत हो जाती है और सजा भी तीन साल से कम ही होती है।
आपराधिक मामलों के वकीलों का कहना है कि सरकार को बिना देरी किए आबकारी एक्ट में संशोधन कर अवैध यानी कच्ची शराब बनाने वालों पर सख्त सजा का प्रावधान करना चाहिए। ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की सजा होनी चाहिए। वरिष्ठ एडवोकेट मंदीप सिंह सचदेवा का कहना है कि हर साल कहीं न कहीं से खबर आती है, कभी उत्तराखंड से तो कभी यूपी तो कभी पंजाब से कि जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत हो गई है।
आबकारी एक्ट की धाराओं के तहत कठोर सजा नहीं है। कच्ची शराब की रिकवरी व बनाने वाले को 60 दिन से लेकर तीन साल की सजा है और 5 हजार से लेकर एक लाख तक का जुर्माना है। अंग्रेजों के वक्त के इस एक्ट में अब काफी बदलाव की जरूरत है। एडवोकेट राजकुमार भल्ला का कहना है कि कच्ची शराब को चेक करने की कोई लैब ही नहीं है। अपने स्तर पर लोग शराब बनाकर आगे बेच रहे हैं। आबकारी एक्ट सख्त नहीं है, जिसका फायदा तस्कर उठाते है।
सरकार को चाहिए कि इस एक्ट में भी कम से कम एनडीपीएस एक्ट जैसी सजा का प्रावधान लाया जाए। अगर कोई कच्ची लाहन या शराब बनाकर बेचता है तो उसको संगीन अपराध की श्रेणी में लाया जाए। जब 10 साल की सजा और मोटा जुर्माना होगा तो तस्कर खुद ही धंधा बंद कर जाएंगे। एडवोकेट राजेश शर्मा का कहना है कि पंजाब की शराब अगर पंजाब में पकड़ी जाए तो आबकारी अधिकारी जुर्माना लगाकर छोड़ सकते हैं। बाहरी राज्यों की शराब पकड़ी जाए तो भी सख्ती नहीं है।
खुद देसी शराब बनाकर बेची जाए तो भी सजा काफी कम है। तस्करी पर लगाम लगाने के लिए सरकार को 1910 के बने आबकारी अधिनियम में बदलाव लाना होगा। घर में शराब बनाकर बेचना भी हत्या का प्रयास ही है, इसका कोई पैमाना नहीं है।
यूपी ने सख्त नियम बनाए, पंजाब भी पहल करे
अगर जहरीली शराब से बड़े पैमाने पर मौतें हुईं तो ऐसी शराब बनाने और बेचने वाले दोनों को ही फांसी की सजा तक हो सकती है। उत्तर प्रदेश में अवैध शराब के इस्तेमाल से मौतें होने या स्थायी अपंगता (आंखें चली जाने, दिव्यांग होने) आदि पर ऐसी त्रासदी के जिम्मेदारों को आजीवन कारावास या फिर दस लाख रुपये तक का आर्थिक दंड या फिर दोनों अथवा मृत्यु दंड देने का प्रावधान किया गया है।
जहरीली शराब के कारण हुई मौत के बाद यूपी सरकार ने अध्यादेश के जरिए आबकारी अधिनियम 1910 की धारा 3, 50, 51, 52, 53, 54, 55, 60, 62,63, 64, 64 क, 65, 66, 67, 68, 69, 69क, 70, 71, 72, 73क, 74, और 74 क में संशोधन किया गया है। इसके साथ ही एक नई धारा-60 क भी जोड़ी गई है। पंजाब में भी एक्ट में संशोधन को लेकर मांग उठने लगी है।