जहरीली शराब से लोग मरते हैं और उसके बाद अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान शुरू होता है। कुछ लोग पकड़े जाते हैं और कुछ समय के लिए कारोबार की रफ्तार कम हो जाती है। फिर वहीं ढर्रा चलने लगता है। पिछले 20 साल से पंजाब में शराब बनाने का धंधा फल फूल रहा है। एथाइल एलकोहल शराब तस्करों के पास कैसे पहुंचता है, इसका पता आज तक पुलिस नहीं लगा पाई है।
अगर इस पर नियंत्रण हो जाए तो मौत का सिलसिला थम सकता है। इसकी सप्लाई वैध रूप से शराब की लाइसेंसी फैक्टिरयों को की जाती है, लेकिन यह अवैध तौर पर तस्करों तक पहुंच जाता है। वहीं मिथाइल अल्कोहल, जिसे काष्ठ स्पिरिट भी कहा जाता है, एक प्रकार का जहर है। इसका उपयोग औद्योगिक प्रतिष्ठानों में रंग रोगन तैयार करने और थिनर आदि बनाने के लिए किया जाता है।
कभी-कभी अवैध कारोबारी जब इसका उपयोग शराब बनाने में कर देते हैं तो यही शराब जहरीली कही जाती है। ऐसी ही शराब तरनतारन, बटाला व अमृतसर इलाकों में तैयार की गई थी, जहां पर एथाइल के स्थान पर मिथाइल एल्कोहल मिक्स कर दिया गया।