‘अपणा पंजाब होवे... घर दी शराब होवे....’ पंजाब में घर दी कड्डी यानी घर में देसी शराब बनाने का सिलसिला काफी पुराना है। पारंपरिक तरीके से देसी शराब गुड़, इलायची, दालचीनी, गुलाब, सौंफ, फलों के फ्लेवर, मुलैठी, कीकर का सत्त से बनाई जाती है। नौसादर से इसे फर्मेंट किया जाता है। यह शराब बनाने का तरीका काफी धीमा होता है और इसे केवल निजी इस्तेमाल के लिए ही बनाया जाता था।
करीब एक हजार रुपये में करीब 14 बोतल शराब तैयार हो जाती है हालांकि तस्कर शराब को ज्यादा नशीली बनाने के लिए ऐसी चीजें मिला देते हैं, जो इसे जहर बना देती है। कुछ लोग मुनाफा कमाने के चक्कर में स्प्रिट में पानी मिलाकर बेच रहे हैं। इसे देसी दारू का नाम दिया जाता है। इसी जहरीली देसी दारू ने दो दिन से पंजाब में मौत का तांडव मचाया हुआ है...
पंजाब में घर दी कड्डी यानी देसी दारू को तैयार करने का सिलसिला सदियों पुराना है। आज भी बड़े जमींदार हो या फिर बड़े अफसर, सभी देसी दारू के शौकीन हैं। खुद के लिए देसी दारू तैयार करने का सिलसिला आज भी पंजाब के कई गांवों में बदस्तूर जारी है। यह शराब जहर नहीं होती। देसी दारू तैयार करने वाले के लिए लुधियाना का बेट एरिया सबसे ज्यादा मशहूर है।
लुधियाना के सतलुज दरिया के किनारे बसे गांवों में देसी दारू तैयार करने का धंधा पुश्तैनी है। दरिया का किनारा होने के कारण यहां छुपने की इतनी जगह होती है कि पुलिस के लिए उन्हें ढूंढना मुश्किल है। शराब के लिए तैयार करने वाले शीरे की बदबू बहुत ज्यादा होती है। इसे रिहायशी एरिया में तैयार करना मुश्किल पड़ता है। इसलिए दरिया का किनारा सबसे सुरक्षित रहता है।
इन एरिया में दिन रात शराब तैयार करने का कारोबार चलता है। सस्ती होने के कारण देसी शराब की मांग ज्यादा होती है। इसलिए इसे जल्द तैयार करने के लिए कई प्रयोग किए जाते हैं। शराब में नशा ज्यादा रहे इसलिए इसमें ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन व यूरिया तक मिलाया जाता है।
14 बोतल तैयार करने को लगते है 4 दिन
देसी दारू तैयार करने वाले एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि गांवों में देसी शराब तैयार करना आम बात है। देसी दारू को लोग सिर्फ अपने लिए या फिर अपने चंद दोस्तों के लिए तैयार करते है। 15 किलो गुड़ से 14 बोतल शराब तैयार होती है। गुड़ से शीरा तैयार करने के लिए कई चीजों को डाला जाता है, जैसे फल, इलायची आदि।
लगभग चार दिन इसको रखा जाता है, इसके बाद शीरा तैैयार होता है। शीरे से शराब की 14 बोतल तैयार करने में करीब 1.30 घंटा लगता है। तब जाकर देसी दारू तैयार होती है। यह गर्म होती है इसलिए इस शराब को बनाने के बाद तीन चार दिन रख दिया जाता है। इसके बाद इसे पिया जाता है। वहीं तस्कर चूना मिलाकर इसे जल्द तैयार करते हैं और कुछ ही घंटों में लोगों को पीने के लिए दे दी जाती है।
ज्यादा नशीली बनाने के चक्कर में बनता है जहर
काफी समय से देसी शराब को बेचने का कारोबार फलफूल रहा है। मुनाफे के चक्कर में शराब को और नशीला बनाया जाता है। जल्द से जल्द शराब तैयार करने के तरीके भी लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। शराब को ज्यादा नशीली बनाने के लिए ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन के लेकर कई चीजों को डाला जाता है।
हालांकि इस तरह घर में शराब तैयार करने पर पाबंदी है, इसके बावजूद गांवों में इसे तैयार किया जाता है। लुधियाना में सतलुज दरिया के किनारे बसे गांवों में ऐसा कारोबार धड़ल्ले से चलता है। हर साल पुलिस हजारों लीटर लाहन बरामद करती है। कुछ दिन बाद फिर से वही कारोबार शुरू हो जाता है।