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चंडीगढ़ : संभल जाइए... सामाजिक दूरी और मास्क की अनदेखी फिर पहुंचा सकती है लॉकडाउन में

Mon, 23 Nov 2020 06:08 PM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
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ये लापरवाही लोगों को पड़ सकती भारी। - फोटो : अमर उजाला
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सामाजिक दूरी का पालन और मास्क पहनने को लेकर लोगों में लापरवाही बढ़ गई है। सैनिटाइजर के इस्तेमाल पर भी अब लोग पहले जितनी जागरूकता नहीं दिखा रहे। आम जनता के साथ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी कोरोना से सुरक्षा उपायों को लेकर सामान्य रवैया अपनाने लगा है। यही वजह है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। 

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विशेषज्ञों को भी इस बात का डर सताने लगा है कि यही स्थिति रही तो कोरोना फिर से पहले जैसा रूप न ले लेगा। कोरोना की दूसरी लहर न आए, इसके लिए विशेषज्ञ लोगों को पहले से ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। 


वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार डॉक्टर रमनीक सिंह बेदी का कहना है कि मौजूदा स्थिति बेहद गंभीर है। हमें संक्रमण पर काबू मिलने लगा है लेकिन इस समय अगर लापरवाही बरती तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ऐसे में पहले की तुलना में ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। यह बात याद रखनी होगी कि एक मरीज से शुरू होकर इस बीमारी ने मौजूदा समय में पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। यह स्थिति कभी भी दोहराई जा सकती है। इसलिए हमें संक्रमण से बचाव के मानकों का और ज्यादा कड़ाई से पालन करना होगा।
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बंद हुए सभी क्वारंटीन केंद्र 
पॉजिटिव केस कम होने पर प्रशासन ने शहर में संचालित सभी क्वारंटीन केंद्रों को बंद कर दिया है। अब पॉजिटिव मिल रहे मरीजों को उनके घर में ही आइसोलेट किया जा रहा है। कुछ गंभीर मरीज पीजीआई के अलावा जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में भर्ती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि घर में पॉजिटिव मरीजों को रखने से संक्रमण बढ़ने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन को संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करते हुए क्वारंटीन केंद्रों को दोबारा खोलकर मरीजों को वहीं आइसोलेट करना चाहिए।

मरीजों के फॉलोअप के नाम पर हो रही खानापूर्ति

होम आइसोलेशन में रखे गए कोरोना मरीजों के फॉलोअप में अब सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। इसे ठीक करने के लिए निदेशक स्वास्थ्य ने औचक निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन धीरे-धीरे वह भी कम हो गई है। इसके कारण फॉलोअप में लगाए गए कर्मचारी भी अनदेखी करने लगे हैं। नतीजन होम आइसोलेशन में रखे गए मरीज भी इस छूट का फायदा उठाते हुए होम आइसोलेशन के मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। इससे परिवार में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

मास्क और सैनिटाइजर की हो रही अनदेखी
कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के साथ ही लोगों की लापरवाही भी काफी बढ़ गई है। शुरुआती दौर में संक्रमण से बचाव के लिए एन-95 मास्क की मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि उसकी कालाबाजारी रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जांच टीम बनानी पड़ी थी लेकिन अब लोग मास्क और सैनिटाइजर के उपयोग में अनदेखी करने लगे हैं। पीजीआई गोल मार्केट, सेक्टर- 32 के मेडिकल शॉप पर मास्क और सैनिटाइजर की मांग आधे से भी कम हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि मार्च से अगस्त तक इसकी मांग चार गुना ज्यादा थी लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी है।

ओपीडी में जांच कराने से कतरा रहे लोग
जीएमएसएच-16 की ओपीडी में जांच की व्यवस्था की गई है लेकिन पॉजिटिव आने के डर से लोग ओपीडी में कोरोना जांच कराने से कतरा रहे हैं। तमाम जागरूकता उपाय के बावजूद अस्पताल में बनाए गए जांच काउंटर खाली नजर आ रहे हैं। वहीं, अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड का संचालन पूर्व की तरह किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद लोग अस्पताल आने से कतरा रहे हैं। 
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डॉक्टर अमनदीप का कहना है कि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर है, वे भी अस्पताल आने को तैयार नहीं हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में कोरोना के कारण मृत्यु दर को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि जिन पॉजिटिव मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर कम पाया जा रहा है, उन्हें अस्पताल आकर इलाज कराने को कहा जा रहा है लेकिन वह साफ मना कर दे रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ रही है।

अस्पताल पहले की तरह तैयार
कोरोना के शुरुआती दौर में पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में जो व्यवस्था की गई थी मौजूदा समय में भी वैसी ही है। पीजीआई में 200 बेड का कोविड अस्पताल, जीएमसीएच-32 में 100 बेड का आइसोलेशन, जीएमएसएच- 16 में 200 बेड का आइसोलेशन और सेक्टर- 48 में 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड रिजर्व है। 
पॉजिटिव केस की कम होती संख्या और प्रशासन की ओर से कम की गई सख्ती के कारण लोग लापरवाह होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वह संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करें। जहां तक पहले चरण की व्यवस्था और मौजूदा स्थिति की तुलना की बात है तो उस दौरान जनता ने भरपूर सहयोग किया था लेकिन अब लापरवाही बढ़ रही है।  - डॉ अमनदीप कौर कंग, स्वास्थ्य निदेशक, चंडीगढ़
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