जीएसटी को लेकर व्यापारियों की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसके नियम-कायदों से व्यापारी और कर सलाहकार पहले ही परेशान थे, लेकिन जीएसटी-फार्म 3बी की रिटर्न सबमिशन के बावजूद पैनल्टी के रूप में एक और मुसीबत अब व्यापारियों के सामने आ गई है। अकेले फतेहाबाद जिले में तकरीबन 70 फीसदी व्यापारी फार्म 3बी की रिटर्न भरने के बावजूद पैनल्टी भुगत चुके हैं। इतना ही नहीं, जिन व्यापारियों ने अभी तक पैनल्टी नहीं भरी है, उन्हें दो सौ रुपये प्रतिदिन लेट फीस के रूप में भी देने पड़ रहे हैं।
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लेट फीस माफी के बावजूद थोपी फीस
जीएसटी को लेकर अधिकारियों और सरकार का इतना खौफ है कि इस बारे में लगातार परेशानी झेलने के बावजूद कोई अपना नाम तक सामने नहीं लाना चाहता। नाम न छापने की शर्त पर व्यापारियों का कहना है कि एक ओर सरकार ने जुलाई व अगस्त माह की लेट फीस माफ कर दी थी, लेकिन फिर भी उन पर अगस्त माह की लेट फीस थौंपी जा रही है। लेट फीस की मार अभी कम नहीं थी कि अब व्यापारियों को 31 अक्तूबर तक टैक्स से संबंधित कई शर्तें और थौंप दी गई हैं, जिसे पूरा करना मुश्किल लग रहा है। इससे व्यापारी वर्ग अपने व्यापार को लेकर काफी हताहत है।
10 हजार के करीब व्यापारी, दो सौ रुपये रोजाना लेट फीस
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10 हजार के करीब व्यापारी, दो सौ रुपये रोजाना लेट फीस
फतेहाबाद जिले में जीएसटी नंबर के तकरीबन 10 हजार व्यापारी हैं। इस बार जीएसटी के 3बी फॉर्म की रिटर्न विभाग के पोर्टल पर सबमिट की गई। रिटर्न सबमिट होने के बाद सरकार की ओर से पिछले माह व्यापारियों को लेट फीस की कोई पैनल्टी नहीं लगाई गई थी।
इसके बाद व्यापारी व कर सलाहकर आश्वस्त हो गए थे कि सबमिशन के बाद कोई लेट फीस नहीं लगेगी। लेकिन सरकार ने बिना कोई नोटिफिकेशन जारी किए 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लेट फीस की पैनल्टी व्यापारियों को थौंप दी। इसके चलते व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब व्यापारियों को हजारों रुपये पैनल्टी के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। सरकार के इस कदम से छोटे व्यापारियों में तो भय का माहौल पैदा हो गया है। इन व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार यूं ही उनको परेशान करती रही तो उनको अपना व्यापार ही बंद करना पड़ेगा। उनका कहना है कि एक ओर सरकार व्यापार को बढ़ावा देने की बात कहती है, वहीं दूसरी ओर लेट फीस पैनल्टी लगाकर उनकी रोजी रोटी छीनने का काम कर रही है। अगर यूं ही पैनल्टी भरते रहेंगे तो उनका धंधा बंद हो जाएगा।
जीएसटी के बदलावों को समझने को नहीं मिल रहा समय
जीएसटी
- फोटो : Amar Ujala
इस हफ्ते में सात तरह की रिटर्न भरनी बाकी
सरकार ने लेट फीस पैनल्टी लगाकर वैसे ही व्यापारियों पर दोहरी मार कर दी थी, अब अक्तूबर माह में व्यापारियों को तिहरी मार झेलनी पड़ रही है। व्यापारियों ने बताया कि अक्तूबर माह में सरकार की ओर से टैक्स से संबंधित कई कार्य हैं, जो इस समयावधि में पूरे होना संभव नहीं। उन्होंने बताया कि पहले व्यापारी फेस्टिवल सीजन में बिजी थे, अनाजमंडी का व्यापारी फसल आने के कारण बिजी है। ऐसे में 31 अक्तूबर तक उनको जीएसटी आर-3-बी, जीएसटी आर-2, टीआरएएन, टीडीएस, टीसीएस, ऑडिट व आइटीआर भरनी है। उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद कर सलाहकारों पर काम का काफी बोझ बढ़ गया है। ऐसे में व्यापारी वर्ग व कर सलाहकारों को मानसिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
जीएसटी के बदलावों को समझने को नहीं मिल रहा समय
कुछ व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार ने घोषणा की थी कि व्यापारियों पर जुलाई व अगस्त महीने की लेट फीस पैनल्टी नहीं लगाई जाएगी। लेकिन अब अगस्त मास की लेट फीस की पैनल्टी लगाई जा रही है। उनका कहना है कि सरकार आए दिन जीएसटी में कोई ना कोई बदलाव कर देती है। उसे समझने में व्यापारियों को समय लगता है। उन्होंने कहा कि पहले जीएसटी को समझने में उनको समय लगा और अब बदलावों के चलते फिर से उन्हें परेशान होना पड़ रहा है।
सरकार दे लेट फीस में राहत
जीएसटी के नए सिस्टम के चलते सरकार को चाहिए कि वह व्यापारियों को लेट फीस से राहत दे तथा प्रत्येक कार्य में समय अंतराल डाले। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को इसे समझने में समय लग रहा है। एक जीएसटी फॉर्म को पोर्टल तक सबमिट करते समय भली प्रकार से चैक करना पड़ता है और इसमें समय लगता है। अक्तूबर माह में इतने कार्य हैं कि इनको यंत्रवत करना नामुमकिन लग रहा है। इसलिए सरकार व्यापारियों को राहत देने का कार्य करे। जिससे व्यापारी वर्ग खासकर छोटे व्यापारियों में भय का माहौल खत्म हो। जीएसटी पोर्टल में भी कई प्रकार की खामियां हैं। जिन्हें दूर करना अति आवश्यक है। हेल्पलाइन नंबर पर भी कोई समाधान नहीं हो रहा। महीनों पहले की गई शिकायतें भी आज तक पेंडिंग पड़ी हैं। ’ -विनोद उतरेजा, कर सलाहकार, फतेहाबाद ।
अफसर बोले, सिर्फ सरकार के आदेशों का कर रहे हैं पालन
हमारे पास जीएसटी को लेकर सरकार की ओर से जो आदेश आ रहे हैं, उन्हीं का पालन किया जा रहा है। हमारे पास जो ऊपर से आदेश आते हैं, उसी के अनुसार ही व्यापारियों को कहा जाता है। इसके अलावा इसमें आगे कुछ नहीं कहा जा सकता।’ -पवन कुमार, डीईटीसी, सेल्स, फतेहाबाद