चंडीगढ़। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) ने सोमवार को 100वें साल में कदम रखा। इसी उपलक्ष्य में पेक की ओर से स्थापना दिवस मनाया गया। कोविड के कारण सभी कार्यक्रम ऑनलाइन हुए। इस दौरान सीनियर व जूनियर एलुमनी पर पुरस्कारों की बारिश हुई। उनको उपलब्धियों के आधार पर पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। सभी एलुमनी ने कहा कि उन्हें पेक के विद्यार्थी होने का गर्व है। यहां बिताए दिनों की बहुत याद आती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने किया। उन्होंने कहा कि पेक आज पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां के एलुमनी दुनिया में रोशनी फैला रहे हैं। इस संस्थान ने कल्पना चावला से लेकर कई एलुमनी दिए हैं। आगे भी पेक ऐसे ही बाजी मारता रहेगा। उन्होंने कहा कि पेक को और आगे ले जाएंगे। पेक के हर कार्य के लिए मेरे घर के दरवाजे खुले हैं। कभी भी कोई भी व्यक्ति आकर उनके मिल सकता है। उन्होंने पेक के अपने अनुभव भी बांटे तो कुछ वर्षों में इससे जुड़े हैं। पेक निदेशक प्रो. धीरज सांघी ने पेक का परिचय दिया और कहा कि पेक को केंद्र सरकार के संस्थान के रूप में आगे ले जाने का प्रयास करेंगे। यूटी प्रशासन के जरिए प्रस्ताव आगे भिजवाएंगे। हमारा प्रयास है कि पेक एनआईटी बने और उसके आगे भी प्रगति करे।
अगले साल नवंबर में होगा भव्य समारोह
पीयू के पूर्व वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने पेक की यात्रा पर प्रकाश डाला। डीन एलुमनाई डॉ. दिव्या बंसल ने पुरस्कारों की घोषणा की। बताया कि अगस्त में पुरस्कारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। एलुमनाई को उनकी उपलब्धि व अन्य कार्यों के जरिए कमेटी ने पुरस्कारों के लिए चुना है। डॉ. उमा बत्रा ने अगले साल नवंबर में पेक के सौ साल पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के बारे में बताया। इस दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर समां बांधा।
सीनियर एलुमनी बोले- पेक के नाम से वह जवां हो जाते
कार्यक्रम में समय का अभाव था, लेकिन पुराने एलुमनी जिनको पुरस्कार दिए गए हैं उन्होंने एक-एक मिनट अपनी-अपनी बात रखी और अपने अनुभव साझा किए। कहा कि पेक के नाम से वह आज भी जवां हो जाते हैं। हॉस्टल से लेकर कैंपस में बिताए दिन याद आते हैं। शिक्षकों का उस समय का प्यार सर्वाधिक था। शिक्षक दोस्तों की तरह होते थे। साथ ही सख्त भी थे। उसी सख्ती के कारण आज उन्होंने लंबी छलांग लगाई और सफलता पाई। उन्होंने कहा कि वह पेक के लिए हमेशा काम करते रहेंगे।
इन्हें मिला प्रतिष्ठित एलुमनी अवार्ड
प्रो. सुभाष चंद्र हांडा : प्रतिष्ठित एलुमनी अवार्ड दिया गया। उन्होंने 1963 में बीएससी सिविल इंजीनियरिंग से की है। आईआईटी रुड़की से वह वर्ष 2004 में प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुए। रुड़की स्कूल फॉर द डीफ के फाउंडर भी रहे हैं।
डॉ. अक्षयी कुमार : 1964 में पेक से बीएससी ऑनर्स मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वह सीएफडी वर्चुअल रिअलटी इंस्टीट्यूट एंड एसीआरआई ग्रुप ऑफ कंपनीज के फाउंडर और निदेशक हैं।
डॉ. मनमोहन एस कालसी : 1967 में बीएससी ऑनर्स इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वह कालसी इंजीनियरिंग के फाउंडर व अध्यक्ष हैं। उनके नाम 35 से अधिक पेटेंट हैं। बड़े स्तर पर शोध कार्य किया है।
जरनैल सिंह : 1970 में बीएससी इंजीनियरिंग ऑनर्स की पढ़ाई की। राष्ट्रीय व प्रदेश की सरकारी सेवाओं के लिए योजनाएं बनाने से लेकर कई बेहतर कार्य किए हैं। वह पीएमओ में भी वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2004 तक सेवाएं दे चुके हैं।
चक्षु कालरा को मिला यंग एलुमनी अवार्ड
चक्षु कालरा को यंग एलुमनी अवार्ड देने की घोषणा की गई। उन्होंने पेक से वर्ष 2004 में बीटेक मैटेरियल्स की पढ़ाई की है। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप के जरिए बेहतर नाम कमाया। कम उम्र में उन्होंने ग्रे बी नाम से इसकी शुरूआत की। उसके फाउंडर भी हैं।