चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में किडनी की पथरी के गंभीर मरीजों का इलाज बंद है। हालांकि, मरीजों को इसका कारण नहीं बताया जा रहा। ऑपरेशन भी बंद है। मरीजों को सर्जरी की नई तारीख भी नहीं दी जा रही है। मरीज परेशान हैं। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। सूत्रों का कहना है कि इसका मुख्य कारण किडनी के पथरी की सर्जरी के लिए उपयोग की जाने वाली दोनों प्रमुख मशीनें लिथोक्लास और पीसीएनएल का खराब होना है। लिथोक्लास मशीन पिछले तीन साल से खराब पड़ी है जबकि पीसीएनएल ने पिछले तीन हफ्ते से काम करना बंद कर दिया है। इन दोनों मशीनों के खराब होने से किडनी में पथरी के रेफर मरीजों का इलाज बाधित हो रहा है क्योंकि छोटे अस्पतालों में सर्जरी के लिए ये आधुनिक मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन मशीनों के मरम्मत की बात कह रहा है लेकिन पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ी मशीन की स्थिति देखकर ये दावे बेकार ही लग रहे हैं। इन दोनों मशीनों के खराब होने से आयुष्मान भारत के मरीज सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं क्योंकि जीएमसीएच 32 में सबसे ज्यादा आयुष्मान भारत के मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। मशीन के साथ विशेषज्ञ की कमी इस मर्ज के मरीजों के इलाज में बाधा बन रही है। मौजूदा समय में सिर्फ एक यूरोलॉजिस्ट डेपुटेशन पर तैनात है, जबकि नियमित पद खाली है। सूत्रों का कहना है कि नियमित पर पर तैनात डॉक्टर ने इलाज की समुचित व्यवस्था उपलब्ध न होने के कारण ही अस्पताल छोड़ा था।
मरीजों की परेशानी कोई नहीं समझता
पंजाब के आयुष्मान भारतके लाभार्थी हरविंदर सिंह ने बताया कि वे पिछले दो हफ्ते से चक्कर लगा रहे हैं। किडनी में पथरी है। पंजाब में इलाज पर डेढ़ लाख रुपये का खर्च आ रहा है। जीएमसीएच 32 में आयुष्मान योजना से इलाज संभव है लेकिन यहां डॉक्टर कुछ बता ही नहीं रहे। बस हर बार यही कहा जा रहा है कि कुछ दिनों बाद आइए। यही समस्या लुधियाना के दविन्दर की भी है। इन दोनों की तरह प्रतिदिन 15 से 20 मरीज ओपीडी से बिना इलाज के लौट रहे हैं।
ऐसे होती है पीसीएनएल से सर्जरी
परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (पीसीएनएल) सर्जरी अक्सर स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है। सर्जरी के दौरान पीठ में एक सेंटीमीटर का छोटा चीरा लगाकर किडनी में प्रवेश किया जाता है। फिर नेफ्रोलिथोटॉमी के वक़्त एक ट्यूब का उपयोग कर पत्थरी को हटा दिया जाता है। ट्यूब के माध्यम से पत्थरी को बाहर निकालने से पहले कभी-कभी तोड़ना पड़ सकता है। नेफ्रोलिथोट्रिप्सी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पथरी को हटाने से पहले उसे तोड़ा जाता है। गुर्दे से सभी पथरी को निकालने के लिए उपचार में आमतौर पर 20 से 45 मिनट का समय लगता है।
बड़ी पथरी का सटीक इलाज
गुर्दे और मूत्रवाहिनी की वह पथरी जो काफी बड़े (आमतौर पर 2 सेंटीमीटर से बड़े) और ठोस होती हैं, उन्हें एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ईएसडब्ल्यूएल) या यूरेरोस्कोपी से इलाज के लिए प्राथमिकता दी जाती है,जबकि 2 सेमी से अधिक कई बड़ी पथरी, या पथरी जो पिछले ईएसडब्लूएल या यूरेटेरोस्कोपी थेरेपी से नहीं निकली हैं, उनका इलाज परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी या स्टोन एक्सट्रैक्शन (पीसीएनएल) के साथ किया जाता है, जो इनको हटाने का एक न्यूनतम इनवेसिव तरीका प्रदान करता है।
कोट-
मशीन की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32