राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को एक मरीज के परिजन को आठ लाख रुपये देने को कहा है, जिसकी विसंक्रमित नहीं किए गए बिस्तर पर स्थानांतरित किए जाने के कारण मौत हो गई थी।
एनसीडीआरसी ने अस्पताल को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी पाया और आयोग ने जिला फोरम के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
इससे पहले राज्य आयोग ने भी अस्पताल को मामले में दोषी पाया था। केएस चौधरी की अध्यक्षता वाली एनसीडीआरसी की एक पीठ ने कहा कि जिरह के बाद जिला फोरम और राज्य आयोग इस नतीजे पर पहुंचे कि बेड नंबर एक के मरीज प्रवीण कुमार की मौत के बाद उसी दिन बेड को विसंक्रमित किए बिना पीड़ित हितेंद्र कक्कड़ को स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे संक्रमण और बढ़ गया। शिकायत के मुताबिक कक्कड़ को 26 अक्तूबर, 2008 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पटाखों के कारण उसके शरीर का 50 फीसदी हिस्सा जल गया था। इसके मुताबिक सात नवंबर, 2008 की सुबह जले हुए एक अन्य मरीज प्रवीण कुमार को भर्ती किया गया और उसे कक्कड़ के बेड पर सुलाया गया।
कुछ घंटों बाद प्रवीण की मौत हो गई। इसके बाद कक्कड़ को एक बार फिर से वही बेड दिया गया, जिसे विसंक्रमित नहीं किया गया था। इस वजह से कक्कड़ की स्थिति बिगड़ गई और उसी दिन बाद में उनकी मौत हो गई।