यहां से पाकिस्तान के साथ-साथ चीन सीमा की निगरानी भी संभव है। कारगिल युद्ध के दौरान पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन ने पाकिस्तान की कमर तोड़ी थी। स्टेशन के सामरिक महत्व को देखते हुए हुई वायुसेना ने यहां पर अपाचे जैसे घातक हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं।
71 के युद्ध में पठानकोट एयरबेस पर हुआ था 53 बार हमला
अति संवेदनशील एयरफोर्स स्टेशन की सूची में शुमार पठानकोट एयरबेस पर 1971 की लड़ाई में 53 बार हमला हुआ था। 1971 के युद्ध में 3 दिसंबर की शाम 5.40 बजे पाकिस्तान की एयरफोर्स ने पठानकोट एयरबेस पर भारी बमबारी की थी। इस दौरान पाकिस्तान के छह लड़ाकू विमानों ने 53 बार हमला करते हुए बम गिराए थे।
इससे पहले 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान भी इस एयरफोर्स स्टेशन को निशाना बनाते हुए बम बरसाए गए थे। 6 सितंबर 1965 में शाम 5 बजकर 35 मिनट पर पाक ने हमला करते एयरबेस के हैंगर में खड़े दो लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचाया था।
जासूसी की जद में भी है पठानकोट एयरबेस
पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन हमेशा पाक की जासूसी की जद में भी रहा है। पाकिस्तान इस स्टेशन की महत्ता को बखूबी जानता है, इसलिए पाक सेना के अफसर इस स्टेशन पर होने वाली हर हरकत और यहां होने वाली अफसरों की हर तैनाती की जानकारी लेने को बेताब रहते हैं। जासूसी के आरोप में यहां संदिग्ध पकड़े भी जा चुके हैं।