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पासपोर्ट अधिकारी के खिलाफ दर्ज नहीं होगा केस, शिकायत खारिज

Mon, 04 Apr 2016 10:57 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
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paperless passports - फोटो : GettyImages
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पासपोर्ट रिन्यू करने से जुड़े एक मामले में पब्लिक रिकॉर्ड नष्ट करने के आरोप में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (आरपीओ) राकेश अग्रवाल के खिलाफ जिला अदालत में दायर एक आपराधिक शिकायत को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया।
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आरपीओ के खिलाफ सेक्टर-49 के मुनीष पराशर ने सीआरपीसी 156 (3) के तहत धोखाधड़ी, सबूत मिटाने और पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट की धारा 9 के तहत एफआईआर दर्ज करने की अपील की थी।

याचिकाकर्ता ने 31 दिसंबर 2015 को यूटी पुलिस की पब्लिक विंडो में दायर शिकायत का हवाला दिया था। इस संबंध में कोर्ट ने थाना-34 एसएचओ से रिपोर्ट तलब की थी। इसमें पूछा गया था कि क्या उनके पास ऐसी कोई शिकायत आई थी और क्या उस पर कोई प्रारंभिक जांच की गई थी।
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इस मामले में एसएचओ ने जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट के कोई परिणाम सामने नहीं आए। पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनीष की शिकायत पर डीएसपी (साउथ) ने निजी तौर पर जांच कराई थी। इसके बाद रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी। जिसमें कोई केस दर्ज नहीं हुआ था।

वहीं मुनीष का आरोप था कि उसके ससुर के प्रभाव में आकर उनका पासपोर्ट संबंधी रिकॉर्ड नष्ट किया गया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसके ससुर ने आरपीओ राकेश अग्रवाल को एक झूठी शिकायत दी थी, जिसके आधार पर शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किए गए थे। वहीं जब उसने संबंधित रिकॉर्ड जांचना चाहा तो उसे बताया गया कि उसकी फिजिकल फाइल नष्ट कर दी गई है।

कोर्ट का आदेश
सीजेएम ने शिकायतकर्ता की सीआरपीसी 156 (3) के तहत दायर शिकायत रद्द करने के पीछे कहा है कि शिकायत एक याचिका के तौर पर थी। वहीं केस दर्ज कराने और जांच के लिए सबूतों को पेश करने से ज्यादा यह कोई निजी मामला लगता है।

कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड की कॉपी स्कैन कर रखने के बाद उसे नष्ट करना सबूत नष्ट करना कैसे माना जा सकता है। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह कोई अपराध है। इसलिए इसमें पुलिस द्वारा केस दर्ज करने और जांच की जरूरत नहीं है। शिकायतकर्ता के पास अपने आरोप पुख्ता करने लायक सबूत नहीं हैं। 
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