पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की वैरीफिकेशन में खुलासा हुआ है कि एक व्यक्ति ने पासपोर्ट बनवाने के लिए बोर्ड द्वारा जारी किए सर्टिफिकेट से छेड़छाड़ की।
उसने सर्टिफिकेट में नाम और जन्मतिथि को बदला था। बोर्ड ने इस संबंध में रिपोर्ट पासपोर्ट अधिकारी को भेज दी है।
साथ ही इस व्यक्ति को अपने रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया है। उसका ब्योरा अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है।
बोर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दो महीने में कई सरकारी विभागों और यूनिवर्सिटीज से सर्टिफिकेट वैरीफिकेशन के लिए पहुंचे।
इसी दौरान रीजनल पासपोर्ट ऑफिस से आए सर्टिफिकेट की जब जांच की, तो अधिकारी भी हैरान रह गए।
सर्टिफिकेट बिल्कुल असली सर्टिफिकेट की तरह दिख रहा था। लेकिन बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक दसवीं कक्षा का यह सर्टिफिकेट मार्च 2000 में सुखदीप सिंह नाम के व्यक्ति को जारी किया गया था।
जबकि पासपोर्ट ऑफिस से आए सर्टिफिकेट में इंद्रजीत सिंह नाम लिखा हुआ था। बोर्ड रिकॉर्ड में जन्मतिथि 12-6-1985 है। जबकि सर्टिफिकेट में जन्मतिथि 25-01-1981 कर दी थी। माता-पिता का नाम सही है।
बोर्ड सचिव ने इस बारे में रीजनल पासपोर्ट ऑफिस चंडीगढ़ को सूचित कर दिया है। साथ ही संबंधित व्यक्ति को बोर्ड के रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
पुलिस एवं आरसीएफ में भी जाली दस्तावेजों से नौकरी
बोर्ड में दस्तावेजों की वैरीफिकेशन के दौरान यह बात सामने आई है कि पुलिस एवं आरसीएफ (रेल कोच फैक्टरी) में जाली दस्तावेजों के आधार पर लोग नौकरियां हासिल करने में कामयाब रहे हैं।
नवंबर में एसएसपी बठिंडा की तरफ से मार्च-2012 का 12वीं श्रेणी का सर्टिफिकेट भेजा गया था।
यह अमीन शर्मा के नाम पर था, जो कि जांच में फर्जी पाया गया। चीफ वेलफेयर इंस्पेक्टर रेल कोच फैक्टरी कपूरथला से मार्च-2012 का दसवीं कक्षा सर्टिफिकेट आया था।
जो कि गुरपाल सिंह के नाम पर बना हुआा था। यह भी जांच में फर्जी पाया गया। नर्सिंग स्कूल सिविल अस्पताल संगरूर से आया 12वीं कक्षा का सर्टिफिकेट भी फर्जी निकला है।