लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर हुई समीक्षा कमेटी में भाजपा नेता खुलकर राज्य सरकार के खिलाफ मुखर हुए। बलरामजी दास टंडन की अगुवाई में हुई मीटिंग में नेताओं ने कहा कि सरकार प्रशासनिक तौर पर फेल रही।
लिए गए फैसलों पर सरकार लोगों का भरोसा नहीं जीत सकी। ड्रग्स, प्रॉपर्टी टैक्स, रेत-बजरी जैसे मुद्दों के चलते चुनाव में पार्टी को नुकसान हुआ। बैठक में अरुण जेटली की हार का मुद्दा छाया रहा।
लोगों को नहीं समझा सकी प्रॉपर्टी टैक्स के बारे में
भाजपा नेताओं का कहना था कि सरकार प्रॉपर्टी टैक्स के बारे में लोगों को सही तरीके से समझा नहीं सकी। इसकी पेचीदगियां भी नहीं दूर कर सकी। नशे के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़का, सरकार इन्हें रोकने के लिए खास कदम नहीं उठा सकी।
रेत-बजरी की कीमतों में बढ़ोतरी से सभी वर्ग प्रभावित हुआ। भ्रष्टाचार भी शहरियों के लिए बड़ा मुद्दा बना। राइट टु सर्विस एक्ट की सही मॉनिटरिंग न होने से भ्रष्टाचार को रोका नहीं जा सका।
इसकी रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी, कमेटी की मीटिंग जल्द दोबारा होगी। बाद में अकाली दल और भाजपा की ज्वाइंट कोर कमेटी में इन सभी मुद्दों को उठाया जाएगा।
मुखर होने के मूड में भाजपाई
भाजपा का कैडर अब सरकार और अकालियों के खिलाफ मुखर होने के मूड में आ गया है। बुधवार की मीटिंग में जिलास्तर के नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व को खरी-खोटी सुनाई।
साथ ही यह भी कह दिया है कि वे बेशक शिअद की नीतियों का विरोध न करें, लेकिन जिलास्तर पर हर गलत फैसले का विरोध किया जाएगा। अगर पुलिस-प्रशासन में अकालियों का दबदबा जारी रहा और उनकी सुनवाई न हुई तो भाजपा खुलकर मुखालफत करेगी।
सूत्र बताते हैं कि अरुण जेटली की हार के बाद हाईकमान ने संकेत दे दिए हैं कि पार्टी अपने पैरों पर खड़ी हो, अपने वोट बैंक को संभाले। ऐसे में जल्द ही अकाली दल और भाजपा में निचले स्तर के नेता आमने-सामने हो सकते हैं।