शहर में जगह-जगह अवैध तरीके से लगे मोबाइल टावरों का मामला तूल पकड़ने लगा है।
पार्कों में 33 टावर लगाने की मंजूरी देने पर हुडा और नगर निगम के बीच हुए विवाद के बाद इस मामले पर राजनीतिक पार्टियाें में भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
पार्टियां बेशक अलग-अलग हैं, लेकिन सबका कहना एक ही है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पंचकूला नगर निगम क्षेत्र के तहत अलग-अलग कंपनियों के करीब डेढ़ सौ मोबाइल टावर लगे हैं, लेकिन इनके लगाने में कई जगह नियमों की अनदेखी के आरोप हैं।
इस मामले में सवाल उठने लगे हैं कि आखिरकार नए बायलॉज जारी होने के बाद भी नियमों की अनदेखी क्यों की गई?
हाल में ही 33 टावरों को लगाने में नियमों की अनदेखी किए जाने के बाद यह मामला सामने आया और दोनों विभागों के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हैं।
सवाल यह भी उठ रहा है कि मार्केट में लगाए गए टावरों के वजन को बर्दाश्त करने में भवन सक्षम हैं या नहीं? इसके लिए भी सर्टिफिकेट किससे और कितनी साइट्स के लिए ली गई हैं?
मोबाइल टावर लगाने में हुडा और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत रही है। इसका आम लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ेगा। खासकर पार्कों में टावर लगाना नियमों की अनदेखी है। बेहतर होगा कि इस मामले में आम जनों की राय ली जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
डीके बंसल, विधायक
मोबाइल टावर लगाने में नियमों के साथ-साथ आम लोगों के हितों की अनदेखी की गई है। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ज्ञानचंद गुप्ता, वरिष्ठ भाजपा नेता
पार्कों में टावर लगाना लोगों की सेहत से खिलवाड़ है। कंपनियां पहले भी काम कर रही थीं, लेकिन नियमों की धज्जियां नहीं उड़ाई जा रही थी।
प्रवीण आत्रेय, इनेलो नेता
यह पंचकूला वासियों की सेहत से खिलवाड़ है। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नगर निगम और हुडा दोनों कार्यालयों के अधिकारियों ने अनदेखी की है।
हरिन्द्र सैनी, आम आदमी पार्टी
टावर लगाए जाने से पहले इस संबंध में बनाई गई नीति पर विचार करने के बाद ही कंपनियों को अनुमति दी जाएगी। नियमों का हर हाल में पालन होगा।
सुनील तलवार, डिप्टी मेयर