इसके अलावा हर प्रोजेक्ट की मंजूरी लेनी होगी केंद्र से
- राज्यपाल और प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने 30 सितंबर के आदेशों में संशोधन किया
- छोटे कामों को हरी झंडी, बड़े प्रोजेक्ट्स पर अब भी मंत्रालय की मुहर जरूरी
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन में वित्तीय शक्तियों पर लगी रोक में आखिरकार थोड़ी राहत दी गई है। पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने 30 सितंबर को जारी आदेशों में संशोधन करते हुए नई गाइडलाइन जारी की है।
अब विभाग सरकारी इमारतों की सफेदी, मरम्मत और छोटे रखरखाव कार्य स्थानीय स्तर पर कर सकेंगे लेकिन नए प्रोजेक्ट और योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी अब भी जरूरी रहेगी।
अब भी ज्यादातर पावर केंद्र के पास
नए आदेशों में साफ किया गया है कि स्कीम या प्रोजेक्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल और खर्च की फाइनल मंजूरी अभी भी गृह मंत्रालय (एमएचए) से ही मिलेगी। पहले जहां एचओडी को ₹1.5 करोड़, चीफ इंजीनियर को 3 करोड़, एडमिन सेक्रेटरी को 20 करोड़, मुख्य सचिव को 50 करोड़ और प्रशासक को 100 करोड़ तक की स्वीकृति का अधिकार था, अब वे सभी अधिकार केंद्र के पास हैं। रविवार को जारी आदेश में सिर्फ छोटे रिपेयर कार्यों की अनुमति दी गई है ताकि त्योहारी सीजन में रुके हुए काम पूरे किए जा सकें।
दो बड़े बदलाव
1. जिन टेंडरों को 19 सितंबर से पहले मंजूरी मिल चुकी थी, अब उन्हें खोलने और काम अलॉट करने की इजाजत दे दी गई है। पहले इन पर रोक लग गई थी, जिससे कई प्रोजेक्ट अटक गए थे।
2. अब सरकारी आवासों की सफेदी और छोटे रिपेयर के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी नहीं होगी। पहले हर कार्य के लिए एमएचए की स्वीकृति लेनी पड़ती थी।
प्रोजेक्ट शब्द पर फिर उलझा इंजीनियरिंग विभाग
नई गाइडलाइन के बावजूद प्रोजेक्ट की परिभाषा को लेकर असमंजस बरकरार है। इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी सरकारी भवन में सिर्फ 1.5 लाख का रिनोवेशन भी करना हो, तो नियमों के अनुसार उसे एमएचए से मंजूरी लेनी पड़ सकती है।
अधिकारियों के अनुसार आदेश में सिर्फ सफेदी और छोटे रिपेयर को ही छूट दी गई है जबकि कमरे में टाइल लगाना या मामूली रिनोवेशन भी प्रोजेक्ट की श्रेणी में आ सकता है।
13 दिन से ठप पड़ा है काम
30 सितंबर को जारी आदेशों के बाद से शहर में एक भी नई फाइल एमएचए को मंजूरी के लिए नहीं भेजी गई है। इंजीनियरिंग विभाग, जो रोजाना 8-10 टेंडर जारी करता था अब पूरी तरह ठप है। एक अधिकारी ने बताया कि कई बिंदुओं पर अस्पष्टता के कारण कोई फाइल आगे नहीं भेजी जा सकी।
नई गाइडलाइन में जेम (गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस) से होने वाली खरीद पर सीमा बढ़ाई
एचओडी: 2 करोड़ से बढ़ाकर 4 करोड़
एडमिन सेक्रेटरी: 15 करोड़ से बढ़ाकर 30 करोड़
मुख्य सचिव: 50 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़
इसके अलावा मिसलेनियस खर्चों के लिए भी वही सीमा लागू रहेगी।