चंडीगढ़ के लाखों लोगों के लिए बड़ा झटका है। केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में यूटी प्रशासन ने साफ कहा है कि न तो लाल डोरा एरिया बढ़ाया जाएगा और न ही कॉलोनियों के लोगों को मालिकाना हक मिलेगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शेयर-वाइज बिक्री, नीड बेस्ड चेंज और हाउसिंग सोसाइटियों को राहत देने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
मालिकाना हक पर प्रशासन ने रिपोर्ट में कहा कि ये कॉलोनियां आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अस्थायी तौर पर बसाई गई थीं ताकि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इन योजनाओं में मालिकाना हक देने का कोई प्रावधान नहीं है। 2023 के सर्वे में सामने आया कि 13,146 साइटों में से 4,709 का लेनदेन जीपीए, एसपीए, एटीएस या वसीयत के जरिये अवैध रूप से किया गया। प्रशासन का कहना है कि अगर अब मालिकाना हक दे दिया गया तो ये मकान खुले बाजार में बिकने लगेंगे और इलाके फिर से स्लम में बदल जाएंगे। इससे योजना का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
नगर निगम में आए 22 गांवों के लाल डोरा क्षेत्र को बढ़ाने की मांग पर प्रशासन ने कहा कि यह चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 और पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट-1952 के खिलाफ होगा। कानून के मुताबिक लाल डोरा से बाहर कोई भी व्यक्ति डीसी की अनुमति के बिना निर्माण नहीं कर सकता।
यह नियम शहर के आसपास बेतरतीब निर्माण और झुग्गियां रोकने के लिए बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी 10 जनवरी 2023 के आदेश में मास्टर प्लान-2031 का पालन अनिवार्य बताया है। प्रशासन के अनुसार लाल डोरा बढ़ाना अवैध निर्माण को वैध ठहराने जैसा होगा।
हाउसिंग बोर्ड के मकानों में नीड-बेस्ड चेंज की मांग पर प्रशासन ने कहा कि इस नाम का कोई नियम चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स-2017 में नहीं है। इन नियमों को 25 जुलाई 2017 को अधिसूचित किया गया था जो नेशनल बिल्डिंग कोड-2016 और मास्टर प्लान-2031 पर आधारित है।
ग्रुप हाउसिंग और को-ऑपरेटिव सोसाइटियों के अनअर्नड इंक्रीज पर प्रशासन ने कहा कि यह चंडीगढ़ एस्टेट रूल्स के नियम 7 के तहत निर्धारित है। दिल्ली में यह दर 50% और चंडीगढ़ में 25% है। इसका उद्देश्य यह है कि रियायती सरकारी जमीन से होने वाले मुनाफे का हिस्सा सरकार को मिले। जीएसटी के लिए प्रशासन ने कहा कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (कन्वर्जन चार्ज, ग्राउंड रेंट आदि) सेवाओं की श्रेणी में आते हैं इसलिए उन पर जीएसटी लागू होगा। सीएचबी ने 24 मई 2019 को एडवांस रूलिंग के लिए आवेदन किया था जिस पर अभी निर्णय लंबित है।
शेयर-वाइज बिक्री और अपार्टमेंटलाइजेशन पर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। प्रशासन ने 9 फरवरी 2023 को पब्लिक नोटिस जारी किया था जिसका उद्देश्य केवल कानूनी और पारिवारिक ट्रांसफर को वैध ठहराना था। बाहरी व्यक्तियों को हिस्सेदारी बेचना प्रतिबंधित है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे चंडीगढ़ के शहरी ढांचे के लिए विनाशकारी बताया था। इस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन 20 फरवरी 2025 को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन के फैसले को सही माना।