चंडीगढ़। पार्किंग पॉलिसी को मंजूरी देने से पहले इसे हाल ही में पुनर्गठित प्रशासक की एडवाइजरी काउंसिल कमेटी के पास भेजा जाएगा। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने पार्किंग पॉलिसी पर कोई भी निर्णय लेने से पहले इस पर काउंसिल कमेटी के सामने विचार विमर्श किए जाने का फैसला लिया है। यूटी प्रशासन ने 25 जुलाई को अंतिम मसौदा नीति को मंजूरी देने के लिए प्रशासक के पास भेज दिया था। प्रशासक ने पॉलिसी का अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया है।
इस संदर्भ में एडवाइजर मनोज परिदा का कहना है कि एडवाइजरी काउंसिल कमेटी की बैठक अगले 10 दिनों के भीतर होनी है। इसमें शहर के विकास से जुड़े कई एजेंडे लाए जाएंगे। इसमें पार्किंग पॉलिसी के एजेंडे को भी लाया जाएगा। पॉलिसी में सेक्टर 17, 22, 35, 43 सहित अधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में पीक ऑवर के समय पार्किंग फीस बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही शहर में कारों की संख्या को कम करने केलिए वाहन मालिकों को हर बार कार खरीदने के बाद पंजीकरण के समय पार्किंग स्थान की उपलब्धता का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। 50 से अधिक कर्मचारियों वाली औद्योगिक या आईटी कंपनियों को कर्मचारियों को बस की सुविधा देने की अनिवार्यता पर कमेटी की राय ली जा सकती है।
कमेटी की सहमति जरूरी
कुछ बिंदुओं पर शहर के लोगों की शिकायतें हैं। यही वजह है कि प्रशासक ने इसे एडवाइजरी काउंसिल कमेटी के समक्ष लाने का निर्णय लिया है। यदि कमेटी ने पॉलिसी को मंजूरी दी तो इसे लागू कर दिया जाएगा। यदि आपत्ति जताई गई तो पॉलिसी को लागू करने से पहले उन बिंदुओं में सुधार किया जाएगा, जिन पर आपत्तियां हैं।
इन बिंदुओं पर एतराज
एक ही घर में खरीदी गई दो कारों की आधी कीमत तक रोड टैक्स लगाया जाएगा। पंजाब-हरियाणा को छोड़कर बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहनों से अन्य वाहनों की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक पार्किंग शुल्क लिया जाएगा। भूखंडों का आकार एक कनाल और उससे अधिक भूखंडों के सामने की सड़क और इसके किनारों पर कार व बाइक खड़ी करने पर चालान का प्रावधान किया गया है।