चंडीगढ़ में प्रदर्शन करते अभिभावक।
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नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन सोमवार को सेक्टर-47 स्थित माउंट कार्मल स्कूल के बाहर पैरेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने अभिभावकों के साथ मिलकर स्कूल में फीस बढ़ोतरी और परिणाम नहीं जारी करने के विरोध में प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरप्रीत कटवाल ने कहा कि कोरोना काल में स्कूल का कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल नहीं हुआ, ऐसे में स्कूल को पिछले सत्र की सिर्फ ट्यूशन फीस लेनी चाहिए। ये आरोप भी लगाया कि स्कूल बच्चों की टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) भी नहीं जारी कर रहा।
अभिभावकों से पहले पिछली फीस जमा करवाने को कहा जा रहा है। कटवाल ने बताया कि स्कूल ने फीस में 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।
इस मामले में स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ. परवीना जोन ने कहा कि स्कूल प्रशासन ने नियमानुसार ही फीस वृद्धि की है। चंडीगढ़ प्रशासन के नियमों का कोई भी उल्लंघन नहीं किया गया है।
स्कूल ने बच्चों के परीक्षा परिणाम भी नहीं रोके हैं। सभी विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम स्कूल के एप पर अपलोड किए जा चुके हैं। अभिभावकों का जो ग्रुप स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर रहा था, उनके बच्चे सोमवार को स्कूल भी आए हैं। सोमवार को बच्चों का स्कूल में पहला दिन था। ऐसे प्रदर्शन दो साल बाद स्कूल आ रहे बच्चों पर नकारात्मक असर छोड़ते हैं।
सौपिन्स-32 में गफलत में दूसरी बस में बैठे दो बच्चे, परिजनों का हंगामा
सेक्टर-32 स्थित सौपिन्स स्कूल में सोमवार को सत्र के पहले दिन तीसरी कक्षा के दो बच्चे गफलत में छुट्टी के बाद दूसरी बस में बैठ गए। जब बच्चे घर नहीं पहुंचे तो अभिभावकों ने कुछ देर तक इंतजार किया फिर पता लगाने स्कूल पहुंचे। स्कूल में पता चला कि बच्चे वहां नहीं हैं। ये जानकर अभिभावक घबरा गए। इस दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और मौके पर बस ट्रांसपोर्टर को बुलाया गया।
ट्रांसपोर्टर ने अपने चालकों को फोन लगाया, जब उनका फोन नहीं उठा तो परिजन और घबरा गए। परिजनों ने बताया कि बाद में उन्हें पता चला कि बच्चे गलत बस में बैठ गए हैं। बस चालक उन्हें वापस स्कूल लेकर आया, तब जाकर मामला शांत हुआ। इस संबंध में परिजनों ने प्रबंधन से लिखित में माफी मांगने और भविष्य में ऐसा दोबारा न होने के लिए आश्वस्त करने को कहा। प्रबंधन ने लिखित में ऐसा कुछ देने से इनकार कर दिया लेकिन आश्वस्त किया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। वहीं स्कूल की प्रधानाचार्य सरिता शर्मा ने कहा कि बच्चे सही बस में बैठे थे, बच्चे नाम सही से नहीं बोल पाए, इसलिए थोड़ी असमंजस हो गई थी।