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मेले में बिछड़ गया था 'लाल', 10 साल बाद मिला

Wed, 04 Mar 2015 09:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चरखी दादरी
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मां बाप के लिए वह पल किसी सपने से कम नहीं था जब 10 साल पहले मेले में बिछड़ा उनका बेटा मिल गया। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के गांव बरुआ कालेंजर निवासी मयंकी देवी का मूक-बधिर बेटा दशहरा मेले से गायब हो गया था। वह भटकते हुए चरखी दादरी के गांव रानीला पहुंच गया था।
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उत्तरप्रदेश के बांदा जिले के गांव बरूवा कालेंजर निवासी मंयकी देवी का मूक-बधिर बेटा सुरेश कुमार 10 साल पहले घर से लातप हो गया था वह गांव के कुछ लड़कों के साथ पास के गांव में दशहरा का मेला देखने गया था । वह किसी तरह  रास्ता भटकते हुए चरखी दादरी के गांव रानीला जा पहुंचा।

गांव रानीला में चल रही श्रीमदभागवत कथा के दौरान कथावाचक शास्त्री गिरीश के पास यह लड़का जा पहुंचा। शास्त्री ने इस लड़के के बारे में पूछताछ की। काफी संख्या में ग्रामीण भी वहां मौजूद थे। बाद में पता चला कि गूंगा सुरेश शास्त्री गिरीश के गांव बरूवा का ही रहने वाला है। शास्त्री गिरीश को अपने पैतृक गांव  का वाशिंदा पाकर युवक को आंसू आ गए।
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शास्त्री गिरीश नेसुरेश के इशारे समझ लिए और उससे कुछ लिखवाया तो पूरा मसला समझ में आ गया। शास्त्री गिरीश ने ग्रामीणों से मिलकर सुरेश के फोटो मेल के माध्यम से  गांव बरवा कालेंजर भिजवाए तो उसके माता-पिता ने अपने बेटे सुरेश को पहचान लिया।

इसके बाद उत्तरप्रदेश के बांदा जिले के गांव बरूवा कालेंजर से मयंकी देवी व राजोल राजपूत गांव रानीला पहुंचे। माता पिता ने अपने बेटे सुरेश को पहचानते हुए उसे गले लगा लिया।
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