आज टाइम पूरी तरह बदल गया है। अब बच्चों के सामने गिने चुने कैरियर ऑप्शन नहीं हैं। बल्कि उनके पास कई विकल्प मौजूद हैं।
बच्चों को उनकी पसंद की लाइन में भेजना तभी संभव है जब पैरेंट्स शुरू से ही बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर सही अच्छी सेविंग स्कीम में पैसा लगाएंगे, ताकि बाद में विपरीत स्थिति आने पर भी उन्हें मुश्किल न उठानी पड़े।
कुछ इसी तरह के टिप्स शनिवार को अमर उजाला एवं बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस के सहयोग से आयोजित पैरेंटिंग सेमिनार में एक्सपर्ट ने पैरेंट्स को दिए।
साथ ही पैरेंट्स के सवालों के जवाब भी दिए गए। इस दौरान पैरेंट्स के लिए क्विज मुकाबला भी आयोजित किया गया। जिसमें विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
सेमिनार सेक्टर-69 स्थित दून स्कूल में आयोजित की गई। सबसे पहले स्कूल प्रिंसिपल मनजीत मादरा ने पैरेंट्स को संबोधित किया। साथ ही बच्चे के जीवन में पैरेंट्स की भूमिका पर प्रकाश डाला।
मैक्स अस्पताल की लाइफ स्टाइल डॉक्टर शबजोत कौर ने कहा कि मॉडर्न समय में पैरेंट्स की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। उन्हें बच्चों का फ्रेंड बनकर उनसे हर चीज शेयर करनी चाहिए। बच्चों को समय से हर चीज के प्रति जागरूक करें।
साइकोलॉजिस्ट नरिंदर सिंह ने भी बच्चों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने की कोशिश की। बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस चंडीगढ़ के रीजनल मैनेजर राहुल शर्मा ने भी पैरेंट्स को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि हमें बच्चों के भविष्य को लेकर शुरू से ही पैसे की सेविंग करनी चाहिए।
इस मौके पर बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस की मोहाली ब्रांच के मैनेजर यश मनचंदा, रीजनल मार्केटिंग मैनेजर वरून मंगल, माइक्रो मार्केट मैनेजर अजय भट्ट, मैनेजर जसपाल सिंह, संजीव शर्मा एवं शहर की प्रमुख हस्ती डा. जीके नंदा भी मौजूद रहीं।
बिरला सन लाइफ करेगा सपने सच
सेमिनार में बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस के रीजनल मैनेजर राहुल शर्मा ने कहा कि हरेक बच्चे के अपने सपने हैं। जिन्हें पूरा करने के लिए उचित फाइनेंस की जरूरत होती है।
ऐसे में उनकी कंपनी के पास कई अच्छे प्लान मौजूद है। इसका लाभ भी लोग उठा सकते हैं। हालांकि उन्होंने लोगों को नसीहत दी कि वे अपनी तसल्ली के लिए अन्य कंपनियों के प्लान भी चेक कर लें।
ऐसे में बच्चा नहीं आएगा डिप्रेशन में
साइकोलॉजिस्ट नरिंदर सिंह ने पैरेंट्स को समझाया कि बच्चों के अंदर कई चीजों के लिए दिलचस्पी पैदा करें। ऐसे में मान लो वह एक क्षेत्र में बढ़िया प्रदर्शन नहीं कर पाता है। तो वह डिप्रेशन में नहीं जाएगा।
वह मानसिक रूप में स्ट्रॉग बनेगा। वह दूसरे क्षेत्र में बढ़िया कर लेगा। साथ ही बच्चों की तुलना करने से बचें। इसके अलावा बच्चों को उचित टाइम पैरेंट्स दें। साथ ही बच्चों को बार-बार किसी चीज के लिए कहने की बजाए एक बार ही कहे।