देश की शान बढ़ाने वाले पैरा ओलंपिक बैडमिंटन खिलाड़ी संजीव कुमार अब नौकरी के लिए भूख हड़ताल पर बैठेंगे। चंडीगढ़ से बैडमिंटन की शुरूआत और यहीं से ट्रेनिंग लेने वाले संजीव कुमार व्हील चेयर पर पिछले कई साल से विदेशों में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। बैडमिंटन में बेहतरीन प्रदर्शन केचलते पंजाब सरकार ने इसी साल जुलाई में संजीव कुमार को महाराजा रंजीत सिंह अवॉर्ड से नवाजा था। संजीव मूल रूप से पंजाब के अबोहर के रहने वाले हैं। पिछले कई साल से संजीव पंजाब सरकार से नौकरी की गुहार लगाते आ रहे हैं।
मौजूदा पंजाब सरकार के मुख्यमंत्री केप्टन अमरिंदर सिंह से भी मुलाकात की और मुख्यमंत्री ने इस खिलाड़ी को नौकरी का आश्वासन भी दिया था। लेकिन इसके बाद से आज तक पंजाब सरकार संजीव को नौकरी नहीं दिला पाई। संजीव ने बताया कि चारों तरफ से निराशा हाथ लगने पर अब उन्होंने परेशान होकर अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री के निवास पर बाहर भूख हड़ताल पर बैठने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि वह दिव्यांग दिवस पर 3 दिसंबर को भूख हड़ताल पर बैठे रहे हैं और जब तक पंजाब सरकार उन्हें नौकरी नहीं देती, तब तक वह हड़ताल जारी रखेंगे।
उन्होंने ने बताया कि भूख हड़ताल के दौरान उनकेसाथ पंजाब के कई अन्य पैरा ओलंपियन खिलाड़ी भी उनका साथ देने पहुंचेंगे। कभी व्हील चेयर तक खरीदने के लिए नहीं थे पैसे- संजीव कुमार केपास समान्य व्हील चेयर थी। वह इसी पर इंटरनेशनल खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करते थे, जबकि इंटरनेशनल लेवल पर स्पोर्ट्स व्हील चेयर का होना जरूरी होता है, लेकिन उनके पास लाख रुपये से अधिक की स्पोर्ट्स व्हीलचेयर खरीरने की क्षमता नहीं थी। इस खिलाड़ी के जनून को देखते हुए एक साल पहले एक खेल प्रशंसक ने स्पोर्ट्स व्हीलचेयर लेकर दी है।
बचपन से पैर खराब- संजीव ने बताया कि जन्म के 10 महीने बाद ही उन्हें पोलियो हो गया था। जिससे उनका एक पैर खराब हो गया। लेकिन इसके बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी। इसी बुलंद हौसले से आज बैडमिंटन में पहचान बनाने में वह कामयाब रहे। संजीव कुमार ने 2008 से पंजाब यूनिवर्सिटी से कोच सुरिंदर महाजन से बैडमिंटन की ट्रेनिंग ली।