चंडीगढ़। कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) के जोगीपुरा गांव निवासी 26 वर्षीय पंकज दुनिया को अलविदा कहकर भी एक गंभीर मरीज को नई जिंदगी और दो दृष्टिहीन लोगों को नेत्र ज्योति दे गए। पीजीआई के डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट के केस में मौत के बाद किडनी प्रत्यारोपित कर एक मरीज की जिंदगी बचा ली।
पीजीआई निदेशक प्रोफेसर जगतराम का कहना है कि अंगदाता परिवार के धैर्य और सहनशीलता के कारण ही किसी को नया जीवन मिल पाना संभव हो सका है। उन्होंने पंकज के परिजनों को समाज के लिए मिसाल बताते हुए कहा कि अगर दुनिया में पंकज के परिजनों जैसी सोच वाले लोगों की संख्या बढ़ जाए तो अंगदान के इंतजार में होने वाली मौतें आसानी से रोकी जा सकेंगी।
बीते 28 दिसंबर को पंकज अपने दोस्त के साथ दोपहिया वाहन से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में पंकज के सिर पर गंभीर चोटें आईं। परिजन तत्काल उन्हें मोहाली के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान 30 दिसंबर को कार्डियक अरेस्ट के कारण पंकज जिंदगी की जंग हार गए। उनके निधन के बाद पंकज के पिता जोगिंदर कुमार ने डॉक्टरों से अंगदान की इच्छा जाहिर की। डॉक्टरों ने बताया कि कार्डियक डेथ के मामले में अंगदान करना बहुत मुश्किल होता है लेकिन परिजनों के अनुरोध के आगे डॉक्टरों ने अंगदान की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान पंकज की एक किडनी और दोनों कॉर्निया ही अंगदान के लिए उपयुक्त पाई गईं।
एक-एक मिनट था बेहद कीमती
अंगदान से मिली किडनी को तत्काल ही किसी मरीज में प्रत्यारोपित करना बेहद जरूरी था क्योंकि अंग प्रत्यारोपण के लिए तय किए गए मानक में से कुछ समय बचे थे। ऐसी स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एएस कोहली ने तत्काल डायलिसिस पर रखे 6 मरीजों की क्रॉस मैचिंग कराई। उनमें से एक मरीज किडनी प्रत्यारोपण के लिए सही पाया गया। इसके बाद सर्जन की टीम ने उस मरीज में सफल प्रत्यारोपण किया। पंकज की दोनों आंखें दो नेत्रहीनों में प्रत्यारोपित की गईं।
दो महीने बाद होनी थी शादी
पंकज के पिता जोगिंदर कुमार ने बताया कि 2 महीने बाद उनके बेटे की शादी होनी थी। घर में तैयारियां चल रही थीं लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। जोगिंदर का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को खोकर जो दु:ख झेला है। वह नहीं चाहते कि दुनिया में किसी और को वह दु:ख झेलना पड़े, इसलिए उन्होंने अपने बेटे का अंगदान कराने का निर्णय लिया ताकि वह दुनिया से जा कर भी किसी दूसरे को नया जीवन दे जाए।