उसी दौरान पीयू से एक प्रोजेक्ट मांगा गया कि वह 85 एकड़ भूमि पर क्या करेगी। पीयू ने विस्तृत प्लान दिया। चार नए छात्रावास खोलने के अलावा 500 शिक्षक आवास व रिसर्च ब्लॉक शुरू करने की योजना दी। बसें भी सभी कैंपस को जोड़ने के लिए चलाने की बात कही। यह प्लान दो बार प्रशासन को दिया गया, लेकिन इस पर मुहर नहीं लग पाई। पीयू के शिक्षकों व छात्रों को बताया गया कि उन्हें जल्द ही पश्चिम कैंपस मिलेगा, लेकिन अभी तक इन सपनों को साकार करने के लिए प्रशासन की हामी का इंतजार है।
पीयू की आय होती दोगुनी, रैंकिंग में होता सुधार
पीयू में हर साल रिसर्च के लिए 500 से अधिक विद्यार्थी दाखिल होते हैं। इतने ही शोधार्थी पहले से कार्य कर रहे होते हैं। इनके अलावा विदेशी विद्यार्थी भी आते हैं। पीयू की योजना थी कि रिसर्च ब्लॉक तैयार होगा तो विदेशी शोधार्थियों को यह आकर्षित करेगा। वे केवल अपने सामान के साथ आएंगे और शोध करके अपने देश चले जाएंगे। हर सुविधा उन्हें रिसर्च ब्लॉक में मिलनी थी। इससे पीयू की आय कई गुना बढ़ती और शोध पेपर देश-दुनिया में छा जाते। इससे रैंकिंग भी बढ़ती, लेकिन ये सभी योजनाएं धरी रह गईं।
चंडीगढ़ प्रशासन के मास्टर प्लान में पीयू के लिए जमीन है, लेकिन अभी हैंडओवर (सौंपी) नहीं हुई है। जैसे ही जमीन मिलेगी तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। -रेणुका बी. सलवान, डीपीआर पीयू
पीयू ने सारंगपुर कैंपस के लिए दो बार प्रस्ताव तैयार करके प्रशासन को दिए, लेकिन जमीन नहीं दी गई। पीयू को मास्टर प्लान में आवंटित की जमीन का एक हिस्सा पीजीआई को दे दिया गया। -प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू
पीयू सीनेट की ओर से यह जमीन का प्रकरण उठाया गया था। पीयू को यह जमीन मिलनी चाहिए ताकि वह अपने कैंपस का विस्तार करके अधिक से अधिक लोगों को ज्ञान बांट सके।
-प्रो. रोनकी राम, पूर्व सीनेटर पीयू
इस प्रकरण के तथ्यों को देखना होगा। मास्टर प्लान के तहत जिस संस्थान को जमीन मिलेगी, उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं या नहीं, यह भी देखना होता है। पीयू के पास 500 एकड़ से अधिक जमीन पहले ही है।
-कपिल सेतिया, चीफ आर्किटेक्ट