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लंबा इंतजार: रिसर्च ब्लॉक और छात्रावासों के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी को पांच साल में जमीन नहीं दे पाया चंडीगढ़ प्रशासन

Sat, 24 Jul 2021 12:01 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

2013 में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से मास्टर प्लान 2030 तैयार किया जा रहा था। इस प्लान में पीयू ने 135 एकड़ जमीन मांगी और वह प्लान के मुताबिक दे दी गई। इस जमीन को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उसी समय पीयू को सौंपा जाना चाहिए था, लेकिन पैसे के अभाव में ऐसा नहीं किया गया
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पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय को अपने पश्चिमी कैंपस की स्थापना के लिए पांच साल में जमीन नहीं मिल सकी है। इस कारण न छात्रों को अभी रिसर्च ब्लॉक मिलेगा और न छात्रावास। विदेशी विद्यार्थियों को इस कैंपस में पढ़ाई के लिए रखा जाना था, पर यह सपना भी अधूरा ही रह गया। पीयू को इंतजार है कि प्रशासन मास्टर प्लान के मुताबिक 135 एकड़ जमीन देगा, क्योंकि वायदे के मुताबिक प्रशासन ने पीजीआई को 50 एकड़ जमीन पहले ही दे दी है। अब बारी पीयू की है। हालांकि पीयू को इसके लिए रकम चुकानी होगी।
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इस तरह प्लान तैयार हुआ
2013 में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से मास्टर प्लान 2030 तैयार किया जा रहा था। इस प्लान में पीयू ने 135 एकड़ जमीन मांगी और वह प्लान के मुताबिक दे दी गई। इस जमीन को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उसी समय पीयू को सौंपा जाना चाहिए था, लेकिन पैसे के अभाव में ऐसा नहीं किया गया जबकि शिक्षण संस्थान के लिए जमीन मुफ्त में मिलनी थी। पीयू के पास वैसे ही पैसे की किल्लत थी। 

दो साल बाद पीजीआई को भी अपने नए कैंपस के लिए जगह चाहिए थी और 2015 में पीयू की 135 एकड़ भूमि में से 50 एकड़ काटकर पीजीआई को दे दी गई। बताते हैं कि पीजीआई को केंद्र से इस जमीन के लिए रकम मिली थी, जो चुका दी गई। अब पीयू के खाते में 85 एकड़ जमीन रही। इस जमीन के लिए भी पीयू चाहती है कि केंद्र सरकार पैसे दे, क्योंकि वेतन से लेकर कई मदों में फंड पीयू को केंद्र से मिलता है।
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दो बार प्रस्ताव तैयार हुआ, पर मुहर नहीं लगी

उसी दौरान पीयू से एक प्रोजेक्ट मांगा गया कि वह 85 एकड़ भूमि पर क्या करेगी। पीयू ने विस्तृत प्लान दिया। चार नए छात्रावास खोलने के अलावा 500 शिक्षक आवास व रिसर्च ब्लॉक शुरू करने की योजना दी। बसें भी सभी कैंपस को जोड़ने के लिए चलाने की बात कही। यह प्लान दो बार प्रशासन को दिया गया, लेकिन इस पर मुहर नहीं लग पाई। पीयू के शिक्षकों व छात्रों को बताया गया कि उन्हें जल्द ही पश्चिम कैंपस मिलेगा, लेकिन अभी तक इन सपनों को साकार करने के लिए प्रशासन की हामी का इंतजार है।

पीयू की आय होती दोगुनी, रैंकिंग में होता सुधार
पीयू में हर साल रिसर्च के लिए 500 से अधिक विद्यार्थी दाखिल होते हैं। इतने ही शोधार्थी पहले से कार्य कर रहे होते हैं। इनके अलावा विदेशी विद्यार्थी भी आते हैं। पीयू की योजना थी कि रिसर्च ब्लॉक तैयार होगा तो विदेशी शोधार्थियों को यह आकर्षित करेगा। वे केवल अपने सामान के साथ आएंगे और शोध करके अपने देश चले जाएंगे। हर सुविधा उन्हें रिसर्च ब्लॉक में मिलनी थी। इससे पीयू की आय कई गुना बढ़ती और शोध पेपर देश-दुनिया में छा जाते। इससे रैंकिंग भी बढ़ती, लेकिन ये सभी योजनाएं धरी रह गईं।

चंडीगढ़ प्रशासन के मास्टर प्लान में पीयू के लिए जमीन है, लेकिन अभी हैंडओवर (सौंपी) नहीं हुई है। जैसे ही जमीन मिलेगी तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। -रेणुका बी. सलवान, डीपीआर पीयू

पीयू ने सारंगपुर कैंपस के लिए दो बार प्रस्ताव तैयार करके प्रशासन को दिए, लेकिन जमीन नहीं दी गई। पीयू को मास्टर प्लान में आवंटित की जमीन का एक हिस्सा पीजीआई को दे दिया गया। -प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू


पीयू सीनेट की ओर से यह जमीन का प्रकरण उठाया गया था। पीयू को यह जमीन मिलनी चाहिए ताकि वह अपने कैंपस का विस्तार करके अधिक से अधिक लोगों को ज्ञान बांट सके। -प्रो. रोनकी राम, पूर्व सीनेटर पीयू

इस प्रकरण के तथ्यों को देखना होगा। मास्टर प्लान के तहत जिस संस्थान को जमीन मिलेगी, उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं या नहीं, यह भी देखना होता है। पीयू के पास 500 एकड़ से अधिक जमीन पहले ही है। -कपिल सेतिया, चीफ आर्किटेक्ट
 
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