इस संबंध में डीएसपी सुखपाल सिंह ने भी कहा कि कार पर बम लिखे जाने और बोरियां रखे जाने से पहले सेना को चाहिए था कि पुलिस को मौका दिखाया जाता। ताकि पुलिस अपने स्तर पर जांच पड़ताल करती। पुलिस ऐसे मामलों से निपटने के लिए पूरी तरह समर्थ है।
लोगों का आरोप नियमों के नाम पर करते हैं परेशान
गौरतलब कि सिविल लाइन इलाके में कुछ हिस्से में फौज तैनात है। इस इलाके में बीते कुछ महीनों से काफी सख्ती की जा रही है। बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वालों अभिभावकों तक को काफी परेशानी होती है। रात के समय 9 से सुबह सात बजे तक इस इलाके की सड़कों के आवागमन पर पाबंदी लगा रहती है। लोगों का कहना है कि सेना सड़क पर बाड़े लगाकर अतिक्रमण कर रही है। जबकि यह पब्लिक सड़क है।
लोगों ने बताया कि सेना के इस रवैये से वह काफी परेशान हैं। बच्चों को करीब आधा किलोमीटर दूर गाड़ी लगाकर पैदल एक किलोमीटर भारी बैग के साथ जाना पड़ता है। फौज बिना ट्रैफिक पुलिस कई बार कागज और कई बार हेलमेट चेक करना शुरू कर देती है। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर विपुल उज्ज्वल से जब बात की गई थी तो उनका कहना था कि हम सभी को हेलमेट पहनना चाहिए लेकिन फौज कागज या हेलमेट की चेकिंग नहीं कर सकती। वह इस मामले को जल्द सुलझाएंगे।