एक निर्दोष को अवैध हिरासत में रखने और बाद में एफआईआर दर्ज करने के मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जुर्माने की यह राशि चार सप्ताह के भीतर पीड़ित को बतौर मुआवजा दिए जाने के आदेश दिए हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि निर्दोष पर पुलिस की ज्यादती के मामले में जुर्माना लगाना बहुत जरूरी है।
इस मामले में पीड़ित के पिता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। अगर मामला हाईकोर्ट तक नहीं पहुंचता तो पीड़ित किस मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरता, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई इस ज्यादती पर उसे दंडित किया जाना बेहद जरूरी है।
लुधियाना के मनप्रीत सिंह के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि 11 अप्रैल 2017 को मोबाइल चोरी के आरोप में पुलिस ने उसके बेटे को अवैध तरीके से हिरासत में ले लिया। हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल 2017 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल वारंट ऑफिसर नियुक्त कर थाने की जांच के आदेश दिए थे।
इसके बाद हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को सीजेएम को मामले की जांच के आदेश दे दिए थे। सीजेएम ने रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस ने युवक को 11 अप्रैल को हिरासत में लिया था लेकिन उसके चार दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, जो कि पूरी तरह से गलत है।